फ्रैंकलिन इंडिया डिविडेंड यील्ड फंड ने पूरे किए 20 साल, AUM 2,300 करोड़ रुपये के पार

मुंबई, 4 जून 2026 : फ्रैंकलिन टेम्पलटन म्यूचुअल फंड के फ्रैंकलिन इंडिया डिविडेंड यील्ड फंड (पहले इसका नाम टेम्पलटन इंडिया इक्विटी इनकम फंड था) ने निवेशकों के लिए वेल्थ क्रिएशन के 20 साल पूरे कर लिए हैं। फंड के 20 साल होने पर इसका एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) 2,300 करोड़ रुपये के पार चला गया है।

यह फंड डिविडेंड यील्ड आधारित इक्विटी इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजी का पालन करता है। इस स्ट्रैटेजी के जरिए फंड ने लंबे समय में अपने बेंचमार्क से बेहतर प्रदर्शन किया है। खास तौर पर पिछले 15 साल और शुरुआत से अब तक के प्रदर्शन में इसने निफ्टी डिविडेंड अपॉर्च्युनिटीज 50 इंडेक्स की तुलना में बेहतर रिटर्न दिया है।

यह फंड मुख्य रूप से उन कंपनियों में निवेश करता है, जिनका डिविडेंड देने का रिकॉर्ड बेहतर होता है। इसका उद्देश्य अलग अलग मार्केट साइकिल में बेहतर रिस्क एडजस्टेड रिटर्न प्रदान करना है।

अगर किसी निवेशक ने फंड की शुरुआत के समय 1 लाख रुपये निवेश किए होते, तो उसका निवेश 30 अप्रैल 2026 तक करीब 13.60 लाख रुपये हो जाता। यानी उसे अपने निवेश पर 13.97% CAGR हासिल होता। वहीं, अगर यही 1 लाख रुपये निफ्टी 500 TRI में निवेश किए गए होते, तो उसी अवधि में यह निवेश 10.3 लाख रुपये होता, यानी 12.39% CAGR हासिल होता।

इस योजना ने सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिए नियमित निवेश के लंबे समय के फायदों को भी साबित किया है। अगर किसी निवेशक ने फंड की शुरुआत से हर महीने 10,000 रुपये का SIP किया होता, तो अप्रैल 2026 के अंत तक उसका एसआईपी निवेश बढ़कर 1.2 करोड़ रुपये से अधिक हो जाता।

फंड के 20 साल पूरे होने के अवसर पर फ्रैंकलिन इंडिया डिविडेंड यील्ड फंड के पोर्टफोलियो मैनेजर राजसा काकुलवरपू ने कहा कि, “यह फंड ऐसी कंपनियों में निवेश करने पर फोकस करता है, जिनका डिविडेंड देने का रिकॉर्ड लगातार अच्छा रहा हो और समय के साथ बढ़ता रहा हो। इसका उद्देश्य अलग-अलग बाजार परिस्थितियों में निवेशकों को स्थिर और लगातार बेहतर रिटर्न देना है। साथ ही बाजार में गिरावट के समय जोखिम को कम रखना भी है। ऐसी कंपनियां अक्सर आकर्षक वैल्यूएशन पर उपलब्ध होती हैं और भविष्य में उनके मूल्य में बेहतर बढ़ोतरी की संभावना भी रहती है।”

फंड की निवेश रणनीति

डिविडेंड यील्ड पर आधारित शेयरों का चयन अलग अलग सेक्टर और मार्केट कैप कैटेगरी में निवेश का डाइवर्सिफिकेशन

चुनिंदा ग्लोबल शेयरों में निवेश रेगुलर इनकम के अवसरों के लिए REITs में अवसर मिलने पर निवेश करना फंड अलग अलग सेक्टर में 50 से कम शेयरों वाला एक डाइवर्सिफाइड पोर्टफोलियो बनाए रखता है। इसके निवेश में प्रमुख सेक्टर ये हैं: बैंकिंग और वित्तीय सेवाएं , पावर एंड एनर्जी , आईटी , एफएमसीजी , एयरोस्पेस एंड डिफेंस , ऑटोमोबाइल , टेलीकॉम,

कंज्यूमर ड्यूरेबल्स , आयल एंड गैस

इंटरनेशनल इन्वेस्टमेंट से पोर्टफोलियो को मिलती है मजबूती

फंड अपने पोर्टफोलियो का एक हिस्सा इंटरनेशनल इक्विटीज में भी निवेश करता है। इससे अलग-अलग देशों, निवेश अवसरों और वैल्यूएशन का फायदा मिलता है और पोर्टफोलियो को बेहतर डाइवर्सिफिकेशन और मजबूती मिलती है।

विदेशी निवेश के लिए फंड फ्रैंकलिन टेम्पलटन की ग्लोबल रिसर्च क्षमताओं का उपयोग करता है, जो अपनी वैल्यू-आधारित निवेश शैली के लिए जानी जाती है।

अप्रैल 2026 तक, फंड का लगभग 8% निवेश इंटरनेशनल इक्विटीज में था। इसमें अमेरिका, साउथ कोरिया और ताइवान जैसे बाजार शामिल थे।

मार्केट कैप के अनुसार निवेश

फंड बाजार की परिस्थितियों के अनुसार लार्ज कैप, मिड कैप और स्मॉल कैप कंपनियों में निवेश का अनुपात बदलता रहता है, हालांकि इसका मुख्य फोकस लार्ज कैप कंपनियों पर रहता है।

पिछले 12 महीनों में फंड का औसत एलोकेशन इस प्रकार रहा:

54% : लार्ज कैप शेयरों में

11% : मिड कैप शेयरों में

13% : स्मॉल कैप शेयरों में

इसके अलावा, अप्रैल 2026 तक फंड ने लिस्टेड 4 रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स (REITs) में भी निवेश किया हुआ था। इन REITs में फंड का कुल एलोकेशन 9% से अधिक था। इस तरह फंड अलग-अलग आकार की कंपनियों और रियल एस्टेट से जुड़े निवेश साधनों में संतुलित निवेश करके बेहतर रिटर्न और डाइवर्सिफिकेशन प्रदान करने का प्रयास करता है।

ब्रॉडर मार्केट की तुलना में ज्यादा डिविडेंड यील्ड

पिछले 12 महीनों में फंड के पोर्टफोलियो ने औसतन 2.71% डिविडेंड यील्ड प्रदान की, जो निफ्टी 500 इंडेक्स की 1.17% डिविडेंड यील्ड से काफी अधिक है। भारत में डिविडेंड आधारित निवेश की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है, क्योंकि निवेशक ऐसे विकल्प तलाश रहे हैं जो उन्हें लंबी अवधि में कैपिटल एप्रिसिएशन का अवसर दें, साथ ही पोर्टफोलियो में स्थिरता बनाए रखें और रेगुलर इनकम की संभावना प्रदान करें।

इसी को ध्यान में रखते हुए, फ्रैंकलिन इंडिया डिविडेंड यील्ड फंड निवेशकों को ऐसी कंपनियों में निवेश का अवसर देता है जो नियमित रूप से डिविडेंड देती हैं। फंड का निवेश अलग अलग सेक्टर, मार्केट कैप कैटेगरीज और देशों में फैला हुआ है।

इस वजह से यह फंड उन निवेशकों के लिए एक बेहतर लॉन्ग टर्म निवेश विकल्प हो सकता है, जो ग्रोथ, रेगुलर इनकम की बेहतर संभावनाएं और पोर्टफोलियो में डाइवर्सिफिकेशन यानी तीनों का बैलेंस बेनेफिट चाहते हैं।

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