निवेशवाणी की जितेंद्र श्रीराम, सीनियर फंड मैनेजर, बड़ौदा बीएनपी परिबा म्यूचुअल फंड के साथ ख़ास बातचीत
सवाल-जंग के दौरान आपने अपने पोर्टफोलियो में क्या बदलाव किए? क्या गिरावट के समय आपने पुराने शेयरों में निवेश बढ़ाया या नए और बेहतर आइडिया चुने?
जवाब : इस जंग की वजह से हमें कई स्तरों पर बदलाव करने पड़े। सबसे पहले हमने क्रूड ऑयल और कुछ कमोडिटी के लिए न्यू नॉर्मल का फिर से आकलन किया, क्योंकि सप्लाई पर असर पड़ा था। उदाहरण के तौर पर, एनर्जी सेक्टर में हमने ऑयल मार्केटिंग कंपनियों में निवेश कम किया और अपस्ट्रीम ऑयल कंपनियों की तरफ रुख बढ़ाया। यह अपने आप में एक बड़ा बदलाव था।
दूसरी बात, एनर्जी मार्केट आपस में जुड़े हुए होते हैं। इसलिए अगर एक हिस्से पर दबाव बढ़ता है तो उसका असर दूसरे हिस्सों पर भी पड़ता है। उदाहरण के लिए, तेल की सप्लाई में दिक्कत आने से बिजली की मांग बढ़ी है। घर के स्तर पर इसे ऐसे समझ सकते हैं कि अगर कुकिंग गैस की कमी हो जाए तो लोग इंडक्शन कुकर का इस्तेमाल बढ़ा देते हैं। इसे हम नए निवेश आइडिया की कैटेगरी में रख सकते हैं।
आखिर में, बाजार में तेज उतार-चढ़ाव और बड़ी गिरावट की वजह से कुछ निवेश ज्यादा आकर्षक लगने लगे। जिन सेक्टर्स और कंपनियों की कमाई को लेकर हमें भरोसा था, वहां हमने अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई।
सवाल-यूएस व ईरान जंग को अब 2 महीने हो चुके हैं, आपके हिसाब से FY27 में बढ़ते कच्चे तेल के दाम, रुपये की कमजोरी और जियो-पॉलिटिकल अनिश्चितता की वजह से कंपनियों की कमाई पर कितना असर पड़ सकता है? किन सेक्टर्स पर सबसे ज्यादा दबाव दिख सकता है?
जवाब : अब जब यह संघर्ष 2 महीने पुराना हो चुका है, तो इसका शुरुआती असर कई सेक्टर्स में दिखने लगा है। जैसे ऑयल मार्केटिंग कंपनियां और टाइल्स बनाने वाली कंपनियां, जिन्हें गैस की कमी का सामना करना पड़ रहा है।
अप्रैल-जून तिमाही में इसका दूसरा असर भी देखने को मिल सकता है। अगर यह संघर्ष लंबे समय तक चलता है, तो फ्यूल की पुरानी कीमतों को बनाए रखना मुश्किल होगा और जल्द ही कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है। इससे खाने-पीने की चीजों (अनाज, सब्जियां, फल) से लेकर इंडस्ट्रियल प्रोडक्ट्स तक, हर जगह माल ढुलाई की लागत बढ़ सकती है। इसके कारण ऊंची कीमतों का असर मांग पर भी पड़ेगा।
ऊंची कीमतों का एक और असर यह है कि साल की शुरुआत में जहां ब्याज दरों में नरमी की उम्मीद थी, अब वहां लंबा ठहराव या ब्याज दर बढ़ने की संभावना बन गई है। इसका सबसे ज्यादा असर उन सेक्टर्स पर पड़ सकता है जिन पर ज्यादा कर्ज है।
सवाल-मार्च में गिरावट के बाद अप्रैल में बाजार में तेज रिकवरी आई। क्या यह तेजी हैरान करने वाली है, जबकि कच्चे तेल की कीमत अभी भी 90-100 डॉलर के आसपास है और रुपया डॉलर के मुकाबले 94-95 के स्तर पर है?
जवाब : बाजार हमेशा वर्तमान स्थिति और भविष्य की उम्मीदों के बीच काम करता है। इसलिए यह तेजी कोई हैरानी की बात नहीं है। अभी कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और रुपये की कमजोरी मौजूदा घटनाओं की वजह से बनी अस्थायी स्थिति है।
लेकिन अमेरिका और ईरान दोनों देशों के अब बातचीत की मेज पर आने की इच्छा ने समाधान की उम्मीद जगाई है। इससे यह अनुमान लगाया जा रहा है कि अगले 1-2 तिमाहियों में स्थिति सामान्य हो सकती है। हमारे अनुसार, बाजार में आई यह तेजी उसी राहत और उम्मीद को दिखाती है।
सवाल-इस समय निफ्टी और पूरे बाजार में वैल्यूएशन आपको कितने आकर्षक लग रहे हैं?
जवाब : भारतीय बाजारों का वैल्यूएशन अब सही स्तर पर आता दिख रहा है। अगर हम लार्जकैप, मिडकैप और स्मॉल कैप सभी कैटेगरी को देखें, तो अब उनके वैल्यूएशन लॉन्ग टर्म एवरेज लेवल के बराबर या उससे नीचे दिखाई दे रहे हैं। इन तीनों में लार्जकैप सबसे ज्यादा आकर्षक लग रहे हैं, क्योंकि विदेशी निवेशकों (FII) की बिकवाली का सबसे ज्यादा असर इन्हीं पर पड़ा था।
सवाल-आगे देखते हुए, इस ज्यादा उतार-चढ़ाव वाले दौर में लंबे समय के निवेशकों के लिए सबसे अच्छे वैल्यूएशन अवसर कहां दिखाई दे रहे हैं?
जवाब : इस समय लार्ज कैप शेयरों के वैल्यूएशन सबसे ज्यादा आकर्षक लग रहे हैं। साथ ही, यह ऐसा सेगमेंट है जिसमें आमतौर पर उतार-चढ़ाव भी कम रहता है। जो निवेशक कम जोखिम और कम अस्थिरता चाहते हैं, उनके लिए बैलेंस एडवांटेज जैसे हाइब्रिड फंड भी अच्छे विकल्प हो सकते हैं। वहीं, जो निवेशक लंबे समय तक निवेश बनाए रख सकते हैं और ज्यादा उतार-चढ़ाव सहने के लिए तैयार हैं, उनके लिए फ्लेक्सी कैप और मल्टीकैप फंड भी अच्छे विकल्प हो सकते हैं।
सवाल-भारत की कंपनियों के लिए Q4 नतीजों का सीजन कैसा रहा? क्या FY27 की पहली तिमाही में ज्यादा दबाव देखने को मिल सकता है?
जवाब : Q4 में इस संघर्ष का ज्यादा असर देखने को नहीं मिला, क्योंकि जंग जैसी स्थिति सिर्फ लगभग 1 महीने तक रही थी। साथ ही, कंपनियों के पास पहले से मौजूद इन्वेंट्री ने भी काफी हद तक असर को संभाल लिया। लेकिन बढ़ते कच्चे तेल के दाम और कमजोर रुपये का असर Q1 में ज्यादा महसूस हो सकता है। हमारे अनुसार, अब FY27 में कंपनियों की अर्निंग ग्रोथ करीब 10-12% रहने की संभावना है, जबकि पश्चिम एशिया संघर्ष से पहले इसकी उम्मीद मिड-टीन्स (लगभग 15%) के आसपास की जा रही थी।





