टाइमिंग नहीं, समय है ज़रूरी: बाजार में सही वक्त तलाशने से ज्यादा अहम है निवेश में टिके रहना

लेखक: संजय ग्रोवर
एमडी एवं सीईओ, बड़ौदा बीएनपी परिबा एसेट मैनेजमेंट इंडिया प्राइवेट लिमिटेड

शेयर बाजार में निवेश को लेकर सबसे आम सवाल होता है—”निवेश शुरू करने का सही समय कब है?” लेकिन दो दशकों से अधिक समय तक वित्तीय बाजारों को करीब से देखने और समझने के बाद मैं पूरे विश्वास के साथ कह सकता हूं कि निवेश में सफलता का राज सही समय चुनने में नहीं, बल्कि पर्याप्त समय तक निवेश में बने रहने में छिपा है।

कई निवेशक वर्षों तक इस इंतजार में रहते हैं कि बाजार में प्रवेश का सबसे बेहतर मौका कब आएगा। वहीं कुछ लोग बाजार में थोड़ी सी गिरावट आते ही घबरा जाते हैं और अपने निवेश संबंधी फैसले बदल देते हैं। लेकिन इतिहास गवाह है कि दौलत बनाने वाले निवेशक वे नहीं होते जिन्होंने बाजार की हर चाल का सटीक अनुमान लगाया, बल्कि वे होते हैं जिन्होंने धैर्य और अनुशासन के साथ लंबे समय तक निवेश जारी रखा।

दरअसल, बाजार की दिशा का सटीक अनुमान लगाना उतना ही कठिन है, जितना यह बताना कि मुंबई में मानसून किस दिन और किस समय दस्तक देगा। दुनिया के सबसे अनुभवी निवेश विशेषज्ञ भी अल्पकालिक बाजार गतिविधियों का सटीक पूर्वानुमान लगाने में अक्सर असफल रहते हैं। इसकी वजह यह है कि बाजार पर वैश्विक घटनाओं, आर्थिक आंकड़ों, भू-राजनीतिक तनाव, वित्तीय संकट और यहां तक कि सोशल मीडिया पर वायरल होने वाली खबरों का भी असर पड़ता है।

इसी संदर्भ में निफ्टी 50 के ऐतिहासिक आंकड़े एक महत्वपूर्ण संकेत देते हैं। वर्ष 2005 के बाद से जब-जब निफ्टी में 10 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई, ऐसी 15 घटनाओं में से 13 बार अगले एक वर्ष के भीतर बाजार ने सकारात्मक रिटर्न दिया। केवल दो अवसरों पर रिटर्न नकारात्मक रहा। इतना ही नहीं, इन गिरावटों के बाद अगले एक वर्ष में औसत रिटर्न लगभग 18 प्रतिशत दर्ज किया गया।

यह आंकड़े बताते हैं कि बाजार की अस्थायी गिरावट को संकट नहीं, बल्कि धैर्य की परीक्षा के रूप में देखना चाहिए। निवेशकों का पैसा बाजार के गिरने से नहीं डूबता, बल्कि अक्सर घबराहट में लिए गए गलत फैसलों से नुकसान होता है।

2005 से 2025 के बीच के आंकड़ों का विश्लेषण भी इसी बात की पुष्टि करता है। इस अवधि में बाजार में आई 10 प्रतिशत की गिरावट वाली 15 प्रमुख घटनाओं का अध्ययन किया गया। इन तारीखों से एक वर्ष बाद मिलने वाले रिटर्न का आकलन करने पर पाया गया कि 15 में से 11 बार निवेशकों को दो अंकों में रिटर्न प्राप्त हुआ। हालिया उदाहरण के तौर पर 4 मार्च 2025 को बाजार 10 प्रतिशत नीचे आया था, लेकिन उसी बिंदु से एक वर्ष बाद निवेशकों को लगभग 11 प्रतिशत का रिटर्न मिला।

मुझे इस संदर्भ में एक रोचक घटना याद आती है। एक कार्यक्रम में सामने की पंक्ति में बैठे एक सज्जन ने देखा कि नाश्ता पीछे की ओर से वितरित किया जा रहा है। जब तक ट्रे उनके पास पहुंची, तब तक सभी खाद्य सामग्री समाप्त हो चुकी थी।

अगली बार उन्होंने तय किया कि मौका नहीं चूकेंगे और पेय पदार्थों के वितरण से पहले पीछे जाकर बैठ गए। लेकिन इस बार वितरण सामने से शुरू हुआ। तभी एक महिला उनके पास कटोरा लेकर आती दिखाई दी। उत्साहित होकर उन्होंने हाथ बढ़ाया, लेकिन उसमें खाने-पीने की कोई वस्तु नहीं थी, बल्कि केवल एक टूथपिक थी।

यह छोटी सी घटना निवेश की दुनिया का बड़ा सबक देती है। हर बार सही समय पकड़ने की कोशिश करना अक्सर उल्टा पड़ जाता है। जो निवेशक लगातार “परफेक्ट टाइमिंग” की तलाश में रहते हैं, वे कई बार अवसर खो देते हैं।

निवेश का मूल मंत्र सरल है—अनुशासन बनाए रखें, नियमित निवेश करें और समय को अपना काम करने दें। बार-बार निवेश की रणनीति बदलना या हर उतार-चढ़ाव पर प्रतिक्रिया देना दीर्घकालिक संपत्ति निर्माण के रास्ते में सबसे बड़ी बाधा बन सकता है।

वास्तव में, निवेश को पर्याप्त समय देना निवेशक के सबसे महत्वपूर्ण निर्णयों में से एक है। जून 1999 में निफ्टी 50 टोटल रिटर्न इंडेक्स की शुरुआत से लेकर पिछले 26 वर्षों के आंकड़ों के अध्ययन से पता चलता है कि यदि किसी निवेशक ने कम से कम सात वर्षों तक निवेश बनाए रखा, तो उसे नकारात्मक रिटर्न मिलने का एक भी उदाहरण नहीं मिला।

20 अप्रैल 2026 तक उपलब्ध आंतरिक शोध के अनुसार, निफ्टी 50 टोटल रिटर्न इंडेक्स का सात वर्षीय औसत रोलिंग रिटर्न लगभग 15 प्रतिशत रहा है। यह दर्शाता है कि लंबी अवधि के निवेशकों को न केवल बेहतर, बल्कि अपेक्षाकृत स्थिर रिटर्न भी प्राप्त हुए।

दौलत किसी छोटी दौड़ से नहीं, बल्कि लंबी मैराथन से बनती है। बाजार अंततः उन्हीं निवेशकों को पुरस्कृत करता है जो धैर्य, अनुशासन और दीर्घकालिक दृष्टिकोण के साथ निवेश में बने रहते हैं।

इसलिए उन बातों पर ध्यान केंद्रित करें जो आपके नियंत्रण में हैं—लंबी निवेश अवधि, नियमित निवेश और भावनाओं पर नियंत्रण। बाकी काम समय और बाजार पर छोड़ दीजिए। अक्सर निवेश में सबसे बड़ा लाभ सही समय चुनने से नहीं, बल्कि पर्याप्त समय तक टिके रहने से मिलता है।

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