बेंगलुरु, 13 अगस्त 2026: भारत के तेजी से विस्तार कर रहे ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) इकोसिस्टम को लेकर स्टैंडर्ड चार्टर्ड ने अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। बेंगलुरु में आयोजित GCC कॉन्फ्रेंस में उद्योग जगत के नेताओं, नीति निर्माताओं और GCC अधिकारियों ने भारत में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स के अगले चरण की संभावनाओं और चुनौतियों पर चर्चा की।
कार्यक्रम में कर्नाटक सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स, सूचना प्रौद्योगिकी, बायोटेक्नोलॉजी एवं विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की सचिव डॉ. मंजुला एन, आईएएस, स्टैंडर्ड चार्टर्ड की ग्रुप चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर तनुज कपिलाश्रमी और स्टैंडर्ड चार्टर्ड इंडिया एवं साउथ एशिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पी.डी. सिंह शामिल हुए। वक्ताओं ने भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका और GCC क्षेत्र में उपलब्ध नए अवसरों पर अपने विचार साझा किए।
2030 तक 105 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है GCC बाजार
भारत वर्तमान में दुनिया के सबसे बड़े GCC इकोसिस्टम की मेजबानी करता है। वैश्विक कंपनियां अब भारत में स्थापित अपने कैपेबिलिटी सेंटर्स को केवल पारंपरिक सर्विस डिलीवरी के लिए इस्तेमाल करने के बजाय नई तकनीक, इनोवेशन और रणनीतिक क्षमताओं के विकास के लिए तेजी से विस्तार कर रही हैं।
उद्योग अनुमानों के अनुसार, भारत का GCC बाजार वर्ष 2030 तक लगभग 105 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच सकता है। इससे वैश्विक ग्लोबल कैपेबिलिटी हब के रूप में भारत की स्थिति और मजबूत होने की उम्मीद है।
2026 की पहली छमाही में ही भारत में 183 नए GCC स्थापित किए गए, जो वैश्विक कंपनियों के बीच भारत की बढ़ती स्वीकार्यता और निवेश आकर्षण को दर्शाता है।
GCC के बदलते स्वरूप के साथ बैंकिंग जरूरतें भी बदलीं
GCC के विस्तार के साथ कंपनियों की वित्तीय और बैंकिंग जरूरतें भी अधिक जटिल हो रही हैं। कंपनियां अब भारत में अपने ऑपरेशंस को वैश्विक नेटवर्क से जोड़ते हुए एकीकृत और डिजिटल बैंकिंग समाधान चाहती हैं।
स्टैंडर्ड चार्टर्ड का कहना है कि वह अपने अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क, डिजिटल बैंकिंग प्लेटफॉर्म और ट्रेजरी सेंटर्स के जरिए GCC कंपनियों को ऑनशोर और ऑफशोर ऑपरेशंस के बीच बेहतर कनेक्टिविटी उपलब्ध करा रहा है।
बैंक के मुताबिक, क्रॉस-बॉर्डर कॉरपोरेट्स और तेजी से विकसित हो रहे GCC ऑपरेटिंग मॉडल्स के साथ काम करने का अनुभव कंपनियों को उनके वित्तीय संचालन को सरल बनाने और वैश्विक बाजारों में विस्तार करने में मदद करता है।
“भारत की GCC स्टोरी नए चरण में प्रवेश कर रही है”
सम्मेलन में स्टैंडर्ड चार्टर्ड की ग्रुप चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर तनुज कपिलाश्रमी ने कहा कि भारत की GCC स्टोरी अब एक नए चरण में पहुंच गई है, जहां ग्लोबल ओनरशिप, इनोवेशन और रणनीतिक प्रभाव इसकी प्रमुख पहचान बन रहे हैं।
उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे कंपनियां अधिक कनेक्टेड और एंटरप्राइज-क्रिटिकल कैपेबिलिटी सेंटर बना रही हैं, उन्हें ऐसे बैंकिंग साझेदारों की जरूरत है जो ग्लोबल बैंकिंग विशेषज्ञता के साथ वास्तविक ऑपरेशनल अनुभव भी रखते हों।
कपिलाश्रमी ने कहा कि ‘सुपर-कनेक्टर बैंक’ के रूप में स्टैंडर्ड चार्टर्ड ग्लोबल कनेक्टिविटी, स्थानीय विशेषज्ञता और भारत में अपने स्वयं के GCC को 25 वर्षों से संचालित करने के अनुभव को एक साथ लाता है। उनके मुताबिक, यह अनुभव बैंक को भारत के GCC विकास की अगली लहर को समर्थन देने के लिए विशिष्ट स्थिति में रखता है।
“भारत की GCC स्टोरी दुनिया के बड़े बिजनेस अवसरों में से एक”
स्टैंडर्ड चार्टर्ड इंडिया एवं साउथ एशिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पी.डी. सिंह ने कहा कि भारत की GCC स्टोरी आज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण बिजनेस अवसरों में से एक है।
उन्होंने कहा कि कंपनियां अब ऐसे ग्लोबली कनेक्टेड और इनोवेशन-आधारित कैपेबिलिटी सेंटर्स विकसित कर रही हैं, जिनका काम केवल लागत कम करना नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर बिजनेस वैल्यू और रणनीतिक क्षमताएं तैयार करना है।
पी.डी. सिंह के मुताबिक, ऐसे मॉडल के लिए बैंकिंग पार्टनर को GCC के संचालन की वास्तविकताओं के साथ-साथ विभिन्न देशों और बाजारों में इसके विस्तार से जुड़ी वित्तीय जटिलताओं को भी समझना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि भारत में अपने GCC को 25 वर्षों से संचालित करने और दुनियाभर में बहुराष्ट्रीय कंपनियों के साथ काम करने का अनुभव स्टैंडर्ड चार्टर्ड को GCC के सफर के हर चरण में कंपनियों का समर्थन करने की क्षमता देता है।
लागत केंद्र से रणनीतिक हब तक बदले GCC
पिछले कुछ दशकों में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर का स्वरूप तेजी से बदला है। जहां पहले GCC मुख्य रूप से लागत-प्रभावी सर्विस डिलीवरी सेंटर के रूप में स्थापित किए जाते थे, वहीं अब वे वैश्विक कंपनियों के लिए स्ट्रैटेजिक एंटरप्राइज हब बन रहे हैं।
इन केंद्रों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल टेक्नोलॉजी, डेटा एनालिटिक्स, रिसर्च एंड डेवलपमेंट और अन्य हाई-वैल्यू क्षमताओं का विकास तेजी से हो रहा है।
स्टैंडर्ड चार्टर्ड का कहना है कि वह इस बदलाव के बीच अगली पीढ़ी के GCC को सक्षम बनाने के लिए अपनी बैंकिंग विशेषज्ञता और प्रत्यक्ष परिचालन अनुभव का इस्तेमाल करेगा।
भारत में अपने स्वयं के GCC को लंबे समय से संचालित करने के अनुभव के साथ बैंक का लक्ष्य कंपनियों को उनके GCC के विस्तार, वैश्विक कनेक्टिविटी और वित्तीय संचालन से जुड़ी जरूरतों में सहयोग प्रदान करना है।
भारत के GCC इकोसिस्टम के तेजी से विस्तार और कंपनियों के बढ़ते रणनीतिक निवेश को देखते हुए आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र देश की डिजिटल और वैश्विक अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण विकास इंजनों में से एक बनने की उम्मीद है।





