‘लॉयल्टी’ – भारत के डिजिटल पेमेंट की नई करेंसी : सर्वे रिपोर्ट - niveshvani.in

‘लॉयल्टी’ – भारत के डिजिटल पेमेंट की नई करेंसी : सर्वे रिपोर्ट

भारत में डिजिटल पेमेंट का चेहरा तेजी से बदल रहा है — और इस बदलाव की नई करेंसी बन गई है ‘लॉयल्टी’
डिजिटल पेमेंट कंपनी फी कॉमर्स की “पेमेंट पल्स रिपोर्ट (H1 2025)” के अनुसार, अब हर पांच में से एक ई-कॉमर्स या फूड एंड बेवरेज (F&B) ट्रांजैक्शन लॉयल्टी प्वॉइंट्स या रिवॉर्ड्स के जरिये किया जा रहा है।


रिवॉर्ड से बढ़ी स्मार्ट स्पेंडिंग की आदत

जनवरी से जून 2025 तक के 20,000 से अधिक व्यापारियों के आंकड़ों पर आधारित यह रिपोर्ट बताती है कि भारतीय उपभोक्ता अब वैल्यू बेस्ड खर्च पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं — यानी सोच-समझकर खर्च करना, न कि सिर्फ आकर्षण या इंस्टेंट ऑफर के चलते।
खासकर दिवाली जैसे त्योहारों में लोग अब पेमेंट करते समय रिवॉर्ड्स और इंसेंटिव का भरपूर इस्तेमाल कर रहे हैं।


ई-कॉमर्स में लॉयल्टी की बंपर ग्रोथ

रिपोर्ट के अनुसार, रिवॉर्ड प्वॉइंट्स से होने वाले डिजिटल पेमेंट्स में सालाना आधार पर 6.2% की जबरदस्त वृद्धि दर्ज की गई है।
साल 2024 की पहली छमाही में कुल डिजिटल ट्रांजैक्शन में रिवॉर्ड पेमेंट्स का हिस्सा 10.86% था, जो 2025 की पहली छमाही में बढ़कर 17.06% पहुंच गया।

यह तेजी इस वजह से आई कि बड़ी ई-कॉमर्स कंपनियों ने अपने ऑफर्स और रिवॉर्ड सिस्टम को सीधे पेमेंट गेटवे से लिंक कर दिया है — यानी एक क्लिक में रिवॉर्ड का इस्तेमाल और खरीदारी आसान।


F&B सेक्टर में भी ‘लॉयल्टी’ की भूख बढ़ी

खानपान (F&B) क्षेत्र में लॉयल्टी ट्रांजैक्शन अब 17.1% तक पहुंच गए हैं, जो पिछले साल इसी अवधि में 15.4% थे।
कई रेस्तरां चेन और QSR ब्रांड्स अब अपने डिजिटल पेमेंट सिस्टम में रिवॉर्ड, कैशबैक और गेमिफाइड प्वॉइंट्स जोड़ रहे हैं।
नतीजा — लॉयल्टी अब सिर्फ मार्केटिंग टूल नहीं, बल्कि खरीदारी का मुख्य कारण बन गई है।


“स्पीड के साथ वैल्यू भी ज़रूरी” – फी कॉमर्स

फी कॉमर्स के को-फाउंडर और हेड ऑफ पेमेंट्स राजेश लोंधे ने कहा,

“भारत का डिजिटल पेमेंट सिस्टम अब एक नए दौर में है, जहां हर ट्रांजैक्शन में वैल्यू उतनी ही अहम है जितनी स्पीड और सुविधा।
आज का ग्राहक सिर्फ सुविधा नहीं चाहता — वह वैल्यू भी तलाशता है, और ‘लॉयल्टी’ अब उस वैल्यू का अहम हिस्सा बन चुकी है।”


EMI अब ज़रूरी खर्चों में भी आम

रिपोर्ट ने एक और अहम ट्रेंड दिखाया — EMI (किस्तों में भुगतान) अब सिर्फ लग्ज़री या गैजेट्स के लिए नहीं, बल्कि जरूरी खर्चों जैसे हेल्थकेयर और एजुकेशन में भी आम होती जा रही है।

  • हेल्थकेयर सेक्टर में EMI पेमेंट्स का हिस्सा अब 17.2% है, जो पिछले साल से 2.1% ज्यादा है।
    यानी अधिक परिवार अब मेडिकल खर्चों के लिए लचीली फाइनेंसिंग अपना रहे हैं।
  • एजुकेशन सेक्टर में EMI का हिस्सा 7.4% तक पहुंच गया है, क्योंकि बढ़ती फीस के बीच स्कूल और कॉलेज भी किस्तों में भुगतान की सुविधा दे रहे हैं।

निष्कर्ष: डिजिटल पेमेंट अब ‘मैच्योर’ हो रहा है

इन सभी आंकड़ों से साफ है कि भारत में डिजिटल वित्तीय व्यवहार (Digital Financial Behaviour) अब ज्यादा परिपक्व हो चुका है।
ग्राहक अब सिर्फ “तेज़ पेमेंट” नहीं चाहते, बल्कि स्मार्ट और वैल्यू-ड्रिवन लेनदेन को तरजीह दे रहे हैं — और इस नए ट्रेंड का नाम है ‘लॉयल्टी’


Abhishek Sinha

Abhishek Sinha is a young and dynamic journalist with 2 years of experience in business news reporting and analysis. Over this period, he has developed strong expertise in covering stock markets, corporate developments, IPOs, economic policies, and sector-specific trends.

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