IGIMS में बच्चों के आंखों के कैंसर ‘रेटिनोब्लास्टोमा’ पर संगोष्ठी, विशेषज्ञों ने शीघ्र पहचान और बेहतर इलाज पर दिया जोर

पटना, 25 जुलाई। इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (IGIMS) के क्षेत्रीय चक्षु संस्थान में बच्चों में होने वाले आंखों के कैंसर ‘रेटिनोब्लास्टोमा’ की समय पर पहचान और बेहतर उपचार को लेकर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। क्षेत्रीय चक्षु संस्थान, स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट और बच्चों के कैंसर के क्षेत्र में कार्यरत संस्था CANKID के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में IGIMS और AIIMS पटना सहित विभिन्न संस्थानों के 100 से अधिक चिकित्सकों और विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया।

कार्यक्रम में रेटिनोब्लास्टोमा से जूझ रहे बच्चों और उनके परिवारों की सहायता, समय पर बीमारी की पहचान, इलाज की उपलब्धता तथा उपचार के दौरान आने वाली व्यावहारिक समस्याओं को दूर करने पर विस्तार से चर्चा हुई।

कार्यक्रम की शुरुआत CANKID की चेयरपर्सन पूनम बगई के संबोधन से हुई। उन्होंने बिहार में बच्चों के कैंसर के उपचार की मौजूदा स्थिति पर प्रस्तुति देते हुए कहा कि पहले की तुलना में राज्य में सुविधाओं का विस्तार हुआ है, लेकिन अभी भी बच्चों में कैंसर की जल्द से जल्द पहचान सुनिश्चित करने की जरूरत है। इसके साथ ही प्रयास होना चाहिए कि आवश्यक जांच और इलाज की सुविधाएं मरीजों को उनके घर के नजदीक उपलब्ध हो सकें।

उन्होंने बताया कि CANKID कैंसर पीड़ित बच्चों और उनके परिवारों को दवाओं और उपचार में आर्थिक सहायता देने के साथ इलाज के दौरान ठहरने, जांच और अन्य आवश्यकताओं में भी सहयोग करती है। संस्था बच्चों और उनके परिजनों को मानसिक एवं भावनात्मक सहयोग भी उपलब्ध कराती है। CANKID की ओर से शोभा और डॉ. हरीश ने भी अपने विचार रखे।

राज्यसभा सांसद धर्मशीला गुप्ता ने किया उद्घाटन

कार्यक्रम का उद्घाटन राज्यसभा सांसद धर्मशीला गुप्ता ने किया। उन्होंने कैंसर से जूझ रहे बच्चों और उनकी सहायता के लिए कार्यरत संस्थाओं को हरसंभव सहयोग देने की प्रतिबद्धता जताई।

IGIMS के निदेशक प्रो. (डॉ.) बिंदे कुमार ने संस्थान में उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं और बच्चों में होने वाले कैंसर के उपचार के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने पीडियाट्रिक कैंसर के क्षेत्र में सुविधाओं के विस्तार पर भी जोर दिया।

डीन एकेडमिक डॉ. ओम कुमार और स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट के प्रमुख डॉ. राजेश कुमार सहित अन्य विशेषज्ञों ने भी रेटिनोब्लास्टोमा के इलाज, जागरूकता और स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने को लेकर अपने सुझाव रखे।

कार्यक्रम में AIIMS पटना के पीडियाट्रिक विभाग के विभागाध्यक्ष, नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. सुनील कुमार सिंह, IGIMS रेडियोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. सुमन, मेदांता पटना के डॉ. राजीव रंजन तथा डॉ. नीलेश मोहन, डॉ. ज्ञान भास्कर और डॉ. प्रेरणा सहित कई चिकित्सक उपस्थित रहे।

रेटिनोब्लास्टोमा की जांच और इलाज की नई तकनीकों पर चर्चा

कार्यक्रम के दूसरे सत्र में वैज्ञानिक कार्यशाला आयोजित की गई। दिल्ली से आईं डॉ. सीमा ने रेटिनोब्लास्टोमा की जांच और उपचार में हो रहे नए बदलावों और आधुनिक तकनीकों की जानकारी चिकित्सकों के साथ साझा की।

कार्यक्रम का संयुक्त आयोजन स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट की डॉ. ऋचा माधवी और क्षेत्रीय चक्षु संस्थान के प्रो. (डॉ.) एम.एस. अली ने किया। इस अवसर पर रेटिनोब्लास्टोमा को मात दे चुके 10 से अधिक बच्चों ने अपने माता-पिता के साथ कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इन बच्चों की मौजूदगी ने कैंसर के खिलाफ समय पर जांच और उपचार के महत्व का सकारात्मक संदेश दिया।

कार्यक्रम के अंत में IGIMS के उपनिदेशक एवं क्षेत्रीय चक्षु संस्थान के प्रमुख डॉ. विभूति प्रसन्न सिन्हा ने धन्यवाद ज्ञापन किया। उन्होंने आधुनिक क्षेत्रीय चक्षु संस्थान की स्थापना के लिए सरकार का आभार जताते हुए कहा कि प्रयास है कि मरीजों को ऐसी सभी आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं संस्थान में ही मिलें, जिनके लिए पहले उन्हें राज्य से बाहर जाना पड़ता था।

उन्होंने चिकित्सकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि इलाज के दौरान मरीजों और उनके परिजनों को होने वाली छोटी-छोटी परेशानियों को भी गंभीरता से समझना होगा। चिकित्सा व्यवस्था को अधिक सुगम और परेशानी मुक्त बनाना जरूरी है, ताकि गंभीर बीमारी से जूझ रहे बच्चों और उनके परिवारों पर इलाज का अतिरिक्त बोझ न पड़े।

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