कभी पारले से शुरू हुआ सफर, आज कोका-कोला की बड़ी बॉटलिंग पार्टनर बनी SLMG Beverages, ऐसे खड़ा किया हजारों करोड़ का कारोबार

नई दिल्ली। गर्मी के मौसम में किसी दुकान से कोका-कोला की ठंडी बोतल खरीदना भले ही आसान हो, लेकिन उस बोतल को फैक्ट्री से ग्राहक तक पहुंचाने के पीछे उत्पादन, पैकेजिंग, ट्रांसपोर्ट, वेयरहाउस और डिस्ट्रीब्यूशन का एक बड़ा नेटवर्क काम करता है। इसी नेटवर्क का अहम हिस्सा है SLMG Beverages, जिसने चार दशक से ज्यादा के सफर में एक पारिवारिक कारोबार को हजारों करोड़ रुपये के बिजनेस में बदल दिया है।

आज SLMG Beverages कोका-कोला की प्रमुख बॉटलिंग पार्टनर्स में शामिल है। कंपनी का कारोबार उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों तक फैला हुआ है। लेकिन इस मुकाम तक पहुंचने की कहानी सिर्फ कारोबार बढ़ाने की नहीं, बल्कि बदलते बाजार के साथ कदम मिलाने, उत्पादन क्षमता मजबूत करने और वितरण नेटवर्क का लगातार विस्तार करने की भी है। इसकी शुरुआत लधानी परिवार ने की थी, जिसने 1980 के दशक में पारले के साथ बॉटलिंग बिजनेस में कदम रखा था।

पारले से शुरू हुआ सफर, कोका-कोला के साथ मिली नई रफ्तार

SLMG Beverages की कहानी करीब चार दशक पुरानी है। लधानी परिवार ने 1982-83 के आसपास पारले के साथ बॉटलिंग कारोबार की शुरुआत की थी। उस दौर में भारत का पैकेज्ड बेवरेज बाजार आज की तरह व्यापक नहीं था, लेकिन परिवार ने इस क्षेत्र में संभावनाएं पहचानीं और धीरे-धीरे अपने कारोबार का विस्तार किया।

साल 1993 में कोका-कोला की भारतीय बाजार में वापसी हुई। इसके बाद लधानी परिवार का बॉटलिंग कारोबार भी कोका-कोला से जुड़ गया। यह साझेदारी आगे चलकर कंपनी के विस्तार का महत्वपूर्ण आधार बनी। समय के साथ उत्पादन क्षमता बढ़ाने, नई फैक्ट्रियां स्थापित करने और अधिक से अधिक बाजारों तक पहुंच बनाने पर जोर दिया गया।

साल 2018 में कारोबार से जुड़ी विभिन्न बॉटलिंग इकाइयों को एक संयुक्त होल्डिंग स्ट्रक्चर के तहत लाया गया। इससे कंपनी को अपने संचालन और विस्तार की योजनाओं को एक बड़े स्तर पर आगे बढ़ाने का अवसर मिला। इसके बाद नए प्लांट, उत्पादन क्षमता में वृद्धि और वितरण नेटवर्क का विस्तार उसकी कारोबारी रणनीति के अहम हिस्से बन गए।

फैक्ट्री से दुकान तक: कारोबार की असली ताकत

कोल्ड ड्रिंक के कारोबार में सिर्फ बड़ी फैक्ट्री होना पर्याप्त नहीं है। चुनौती यह भी है कि बाजार की मांग के मुताबिक उत्पादन हो और तैयार उत्पाद समय पर दुकानों तक पहुंचें। गर्मियों में मांग बढ़ने पर इस पूरी व्यवस्था की अहमियत और बढ़ जाती है।

SLMG Beverages ने उत्पादन के साथ-साथ डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क को मजबूत करने पर भी ध्यान दिया है। कंपनी के अनुसार, उसके पास आठ बॉटलिंग यूनिट हैं और इन सुविधाओं में करीब 250 मिलियन डॉलर का निवेश किया गया है।

कंपनी के उत्पाद पोर्टफोलियो में कोका-कोला के अलावा थम्सअप, स्प्राइट, फेंटा, माजा, लिम्का, मिनट मेड, किनले और डाइट कोक जैसे ब्रांड शामिल हैं। इन उत्पादों को ग्राहकों तक पहुंचाने के लिए फैक्ट्रियों से लेकर डिस्ट्रीब्यूटर और रिटेल दुकानों तक एक विस्तृत सप्लाई चेन काम करती है।

इस तरह कंपनी का कारोबार सिर्फ बोतलों में पेय पदार्थ भरने तक सीमित नहीं है। इसके साथ लॉजिस्टिक्स, परिवहन, भंडारण, वितरण और खुदरा कारोबार से जुड़ी गतिविधियां भी जुड़ी हैं।

8,000 करोड़ रुपये के पार पहुंचा राजस्व

SLMG Beverages के विस्तार का अंदाजा उसके कारोबार के आकार से लगाया जा सकता है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, कंपनी ने 2025 में 8,000 करोड़ रुपये से अधिक के राजस्व का आंकड़ा पार किया। अब कंपनी की नजर 10,000 करोड़ रुपये के राजस्व स्तर तक पहुंचने पर है।

इतने बड़े कारोबार को आगे बढ़ाने के लिए लगातार निवेश, उत्पादन क्षमता में वृद्धि और बाजार की मांग के अनुरूप रणनीति बनाना जरूरी है। नए प्लांट और वितरण नेटवर्क का विस्तार इस दिशा में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

हालांकि, कंपनी के वित्तीय आंकड़ों की तुलना करते समय यह ध्यान रखना जरूरी है कि अलग-अलग रिपोर्टों में राजस्व या बिक्री के आंकड़े अलग हो सकते हैं। इसकी वजह रिपोर्टिंग अवधि, कारोबार के दायरे और गणना के तरीकों में अंतर हो सकता है।

अमेठी से गोरखपुर तक विस्तार की तैयारी

उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए SLMG Beverages ने उत्तर प्रदेश में भी बड़े निवेश किए हैं। साल 2024 में अमेठी जिले के त्रिशुंडी इंडस्ट्रियल एरिया में करीब 700 करोड़ रुपये की बॉटलिंग सुविधा शुरू की गई। इसके बाद गोरखपुर में भी लगभग 700 करोड़ रुपये के नए बॉटलिंग प्लांट की योजना सामने आई।

कंपनी उत्तर प्रदेश और बिहार में विस्तार के लिए आने वाले वर्षों में करीब 5,000 करोड़ रुपये तक निवेश करने की योजना पर भी काम कर रही है।

इस तरह के विस्तार में सिर्फ फैक्ट्री का निर्माण ही शामिल नहीं होता। इसके लिए वेयरहाउस, परिवहन, कूलिंग उपकरण और सप्लाई चेन से जुड़े दूसरे संसाधनों की भी जरूरत होती है। जिन क्षेत्रों में पेय पदार्थों की मांग बढ़ रही है, वहां उत्पादन और वितरण क्षमता मजबूत करना कंपनी के लिए महत्वपूर्ण है।

नए प्लांट से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा होने और परिवहन, पैकेजिंग तथा अन्य सहायक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की भी संभावना है।

जीरो-शुगर ड्रिंक्स पर बढ़ता फोकस

भारत का बेवरेज बाजार भी बदल रहा है। ग्राहक अब सिर्फ स्वाद और कीमत ही नहीं, बल्कि अपनी डाइट और चीनी की खपत पर भी ध्यान देने लगे हैं। ऐसे में जीरो-शुगर और कम कैलोरी वाले पेय पदार्थ कंपनियों के लिए नए अवसर पैदा कर रहे हैं।

SLMG Beverages के जॉइंट मैनेजिंग डायरेक्टर पारितोष लधानी के मुताबिक, जीरो-कैलोरी बेवरेज फिलहाल कंपनी की बिक्री में करीब 3-4 प्रतिशत योगदान देते हैं। कंपनी को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2027 तक यह हिस्सेदारी बढ़कर 5-6 प्रतिशत तक पहुंच सकती है।

यह बदलाव बताता है कि भविष्य में कंपनी की ग्रोथ सिर्फ उत्पादन बढ़ाने पर निर्भर नहीं करेगी। ग्राहकों की बदलती पसंद को समझना, नए उत्पादों की मांग का आकलन करना और बाजार में उनकी उपलब्धता सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी होगा।

IPO से पहले विस्तार पर नजर

SLMG Beverages के बड़े कारोबार के बीच उसके संभावित आईपीओ को लेकर भी चर्चा होती रही है। हालांकि, कंपनी की प्राथमिकता फिलहाल कारोबार का विस्तार करने, उत्पादन क्षमता बढ़ाने और नए बाजारों में अपनी मौजूदगी मजबूत करने की बताई गई है।

किसी भी कंपनी के आईपीओ की तैयारी में वित्तीय प्रदर्शन, कारोबारी संरचना, भविष्य की विकास योजनाओं और निवेशकों के लिए उपलब्ध जानकारी की पारदर्शिता महत्वपूर्ण होती है। SLMG Beverages के लिए भी कारोबार को मजबूत करना और विस्तार की योजनाओं को आगे बढ़ाना अहम रहेगा।

चार दशक का सफर, अब अगली मंजिल की तैयारी

लधानी परिवार ने जब बॉटलिंग बिजनेस शुरू किया था, तब भारत का कोल्ड ड्रिंक बाजार आज के मुकाबले काफी अलग था। चार दशक से अधिक समय में यह पारिवारिक कारोबार कई राज्यों तक पहुंचा और हजारों करोड़ रुपये के राजस्व वाले व्यवसाय में बदल गया।

कोका-कोला के साथ लंबे समय से चली आ रही साझेदारी, उत्पादन सुविधाओं में निवेश और व्यापक डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क ने इस सफर में अहम भूमिका निभाई है।

अब कंपनी के सामने अपनी विकास गति बनाए रखने, प्रतिस्पर्धा का सामना करने और ग्राहकों की बदलती जरूरतों के अनुरूप कारोबार को ढालने की चुनौती है। पारले के साथ शुरू हुआ यह सफर आज बड़े बॉटलिंग बिजनेस तक पहुंच चुका है। आने वाले वर्षों में कंपनी अपने विस्तार की योजनाओं को किस तरह आगे बढ़ाती है, यही उसकी अगली कारोबारी मंजिल तय करने में महत्वपूर्ण होगा।

 

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