AI आधारित प्रोजेक्ट्स 2030 तक भारतीय टेक कंपनियों की कमाई का 5वां हिस्सा देंगे – रिपोर्ट - niveshvani.in

AI आधारित प्रोजेक्ट्स 2030 तक भारतीय टेक कंपनियों की कमाई का 5वां हिस्सा देंगे – रिपोर्ट

मुंबई, 20 नवंबर 2025: नई रिपोर्ट के अनुसार, आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस (AI) भारत की IT सर्विसेज और सॉफ्टवेयर एक्सपोर्ट इंडस्ट्री के लिए आने वाले वर्षों में सबसे बड़ा ग्रोथ इंजन बनने जा रहा है। रिपोर्ट का अनुमान है कि 2030 तक भारतीय टेक कंपनियों की कुल आय का करीब 20% हिस्सा AI आधारित प्रोजेक्ट्स से आएगा।

रिपोर्ट में कहा गया है कि 2030 तक ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCC) की आय 100 अरब डॉलर से अधिक हो जाएगी और AI तकनीक भारत को उत्पादन क्षमता में लगभग 200 अरब डॉलर का लाभ पहुंचाएगी। इसके अलावा, 2026 में डिजिटल सेक्टर में 6 अरब डॉलर से अधिक की पूंजी जुटने की संभावना है।


🔹 AI: टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री के लिए खतरा नहीं, बल्कि सबसे बड़ा अवसर

रिपोर्ट के अनुसार AI:

✔ कंपनियों की उत्पादकता तेज़ी से बढ़ा रहा है
डिलिवरी मॉडल और प्राइसिंग स्ट्रक्चर बदल रहा है
✔ पूरे सेक्टर में मर्जर और एक्विज़िशन (M&A) डील्स बढ़ा रहा है

विशेषज्ञों के अनुसार, AI से सबसे बड़ा बदलाव कंपनियों की टाइम एंड मैटेरियल प्राइसिंग मॉडल से हटकर आउटकम बेस्ड प्राइसिंग (OBP) की ओर जाने से आया है।
टेस्टिंग, कोडिंग, मेंटेनेंस और डेटा मॉनिटरिंग जैसे कार्य ऑटोमेशन की वजह से 45–50% तक उत्पादकता में इजाफा दर्ज किया गया है।


🔥 M&A की सबसे बड़ी लहर AI में ही

रिपोर्ट बताती है कि M&A डील्स अब 3 प्रमुख थीम पर केंद्रित होंगी:

1️⃣ AI आधारित डिलिवरी मॉडल वाली कंपनियां
2️⃣ एआई-सक्षम प्लेटफॉर्म और सॉफ्टवेयर प्रोडक्ट्स
3️⃣ AI स्किल डेवलपमेंट और अपस्किलिंग कंपनियां

विशेषज्ञों का अनुमान है कि UAE और एशिया-प्रशांत क्षेत्र में M&A गतिविधियां सबसे तेज़ बढ़ेंगी, जबकि अमेरिका और यूरोप की ग्रोथ फिलहाल धीमी है।
इसके अलावा, चिप डिजाइन, एम्बेडेड इंजीनियरिंग, लाइफ साइंसेज, फार्मा, ऑटोमोटिव और सस्टेनेबिलिटी जैसे सेक्टरों में अधिग्रहण तेजी के साथ बढ़ने की संभावना है।


🌍 GCC मार्केट 100 अरब डॉलर के युग में प्रवेश कर रहा

रिपोर्ट के अनुसार, भारत में GCC (ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स) मार्केट पिछले पांच वर्षों में दोगुने से अधिक बढ़ा है।
GCC सेक्टर की आगे की ग्रोथ तीन प्रमुख कारणों से होगी:

🔹 सरकारी नीतियों का अनुकूल समर्थन
🔹 टियर-2 और टियर-3 शहरों में विस्तार
🔹 कम लागत पर उच्च गुणवत्ता वाला टैलेंट उपलब्ध होना


💰 डिजिटल सेक्टर – “किसी भी कीमत पर ग्रोथ” से “किसी भी कीमत पर मुनाफा” की ओर

डिजिटल कंपनियों में निवेश के पैटर्न में बड़ा बदलाव आया है।

📌 वैल्यूएशन मल्टीपल 30x से घटकर 8–10x
📌 जिन स्टार्टअप्स में अधिक कैश बर्न था उनकी वैल्यूएशन 50–70% गिर गई
📌 अब 70% लेट-स्टेज फंडिंग सिर्फ उन्हीं कंपनियों को मिल रही है जो मुनाफे में हैं
📌 2022 के बाद से कैश-फ्लो पॉजिटिव IPO उम्मीदवारों में 3 गुना बढ़ोतरी

विश्लेषकों के अनुसार, लाभ कमाने वाली कंपनियों की संस्थागत निवेशकों में 2–4 गुना ज्यादा मांग है, और सिर्फ 2–3% मार्जिन सुधार भी किसी कंपनी की वैल्यूएशन 10–20% बढ़ा देता है।


📌 AI से लागत कम, मार्जिन और प्रॉफिट में सुधार

AI आधारित ऑटोमेशन की वजह से Zomato, Paytm, Rategain जैसी कंपनियों में 2–4% मार्जिन सुधार दर्ज हुआ है, जिससे उनकी वैल्यूएशन भी बढ़ी है।
M&A की नई तस्वीर:

✔ डिजिटल M&A डील्स में 40% सालाना वृद्धि
✔ अब 55% से अधिक डील वैल्यू कॉरपोरेट बैलेंस शीट्स से
✔ कंसॉलिडेशन उन कंपनियों पर केंद्रित जो मुनाफा बढ़ाएं

2026 में डिजिटल सेक्टर में 6 अरब डॉलर से अधिक नई इक्विटी जारी होने की उम्मीद है।


🚀 2026 के लिए 3 मेगा-ट्रेंड

रिपोर्ट के अनुसार आने वाले वर्षों में:

1️⃣ AI से भारत को 200 अरब डॉलर की उत्पादकता बढ़ोतरी
2️⃣ डेटा प्रोटेक्शन कानून (DPDPA 2023) से कंपनियों पर 12,000–15,000 करोड़ खर्च का दबाव
3️⃣ 50% ऑनलाइन यूजर्स वॉइस-फर्स्ट हो जाएंगे → इससे टियर-2/टियर-3 शहरों में सोशल कॉमर्स 25–30% CAGR से बढ़ेगा

  • Abhishek Sinha

    Abhishek Sinha is a young and dynamic journalist with 2 years of experience in business news reporting and analysis. Over this period, he has developed strong expertise in covering stock markets, corporate developments, IPOs, economic policies, and sector-specific trends.

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