डबलिन, 26 नवंबर 2025: आयरलैंड स्थित भारतीय दूतावास में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान भारत के राजदूत अखिलेश मिश्रा ने भारतीय संविधान की प्रस्तावना का वाचन संस्कृत भाषा में किया, जिसने पूरे सभागार में भारतीय संस्कृति और संविधान की गौरवशाली परंपरा का अद्वितीय संगम प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम के दौरान दूतावास परिसर में उपस्थित भारतीय समुदाय, आयरिश अतिथि, शिक्षाविदों और सांस्कृतिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने खड़े होकर संविधान की प्रस्तावना के संस्कृत पाठ को सुना। यह क्षण न केवल सांस्कृतिक गर्व का प्रतीक रहा, बल्कि भारत की प्राचीन भाषा—संस्कृत—और आधुनिक लोकतांत्रिक मूल्यों के बीच गहरे संबंध को भी रेखांकित करता है।
राजदूत मिश्रा ने कहा कि भारतीय संविधान दुनिया के सबसे प्रगतिशील और समावेशी संविधानों में से एक है, और इसे संस्कृत में पढ़ना “भारत की सभ्यता, दर्शन और आधुनिक लोकतांत्रिक भावना की निरंतरता” का प्रतीक है। उन्होंने यह भी कहा कि संविधान केवल प्रशासनिक दस्तावेज नहीं, बल्कि “राष्ट्र की आत्मा, आकांक्षा और सामूहिक संकल्प का घोषणापत्र” है।
कार्यक्रम में भारतीय मूल्यों, बहुलवाद, लोकतंत्र और वैश्विक मानवता में भारत के योगदान पर विचार-विमर्श भी हुआ। प्रतिभागियों ने भारतीय संविधान की प्रस्तावना को संस्कृत, हिंदी और अंग्रेज़ी—तीनों भाषाओं में प्रदर्शित करने के कदम का स्वागत किया।
भारतीय दूतावास, आयरलैंड ने घोषणा की कि आने वाले दिनों में संविधान दिवस के उपलक्ष्य में कई सांस्कृतिक, शैक्षिक और युवा-केंद्रित आयोजनों की रूपरेखा तैयार की गई है, ताकि भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों को वैश्विक स्तर पर अधिक व्यापक रूप से साझा किया जा सके।






