एनटीपीसी की अनुसंधान एवं विकास इकाई NETRA हरित ऊर्जा क्षेत्र में एक और ऐतिहासिक कदम बढ़ाने जा रही है। कंपनी अपने ग्रेटर नोएडा परिसर में प्लाज़्मा गैसीफिकेशन आधारित ग्रीन हाइड्रोजन संयंत्र स्थापित करेगी। यह अत्याधुनिक संयंत्र प्रतिदिन 1 टन (1 tonne) ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन करने में सक्षम होगा, जो स्वच्छ ऊर्जा और सतत विकास की दिशा में एनटीपीसी की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
इस महत्वाकांक्षी परियोजना में नगरपालिका ठोस अपशिष्ट (MSW-RDF) और कृषि कचरे को फीडस्टॉक के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा। प्लाज़्मा गैसीफिकेशन तकनीक के जरिए इस कचरे को टार-रहित सिंगैस (Syngas) में बदला जाएगा, जिसे बाद में PSA/मेम्ब्रेन तकनीक से प्रोसेस कर हाइड्रोजन का उत्पादन किया जाएगा। यह प्रक्रिया न केवल वेस्ट-टू-एनर्जी मॉडल को नई पहचान देती है, बल्कि औद्योगिक स्तर पर स्वच्छ और हरित ईंधन उत्पादन की राह भी मजबूत करती है।
देश की ऊर्जा आवश्यकताओं में एनटीपीसी का योगदान पहले से ही विशाल है। कंपनी भारत की कुल बिजली मांग का लगभग 25% (एक-चौथाई) हिस्सा पूरा करती है। वर्तमान में एनटीपीसी की स्थापित विद्युत क्षमता 85 गीगावाट से अधिक (85 GW+) है, जबकि 30.90 गीगावाट क्षमता निर्माणाधीन है, जिसमें 13.3 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) शामिल है।
एनटीपीसी ने भविष्य के लिए भी बड़े लक्ष्य तय किए हैं— 2032 तक 149 गीगावाट (जिसमें 60 गीगावाट Renewable Energy) और 2037 तक 244 गीगावाट क्षमता हासिल करने की योजना है। थर्मल, हाइड्रो, गैस, सौर और पवन ऊर्जा संयंत्रों के विविध पोर्टफोलियो के साथ कंपनी देश को विश्वसनीय, किफायती और हरित बिजली उपलब्ध कराने के लिए समर्पित है।
ऊर्जा उत्पादन के साथ-साथ, एनटीपीसी ने ई-मोबिलिटी, बैटरी स्टोरेज, पंप्ड हाइड्रो स्टोरेज, वेस्ट-टू-एनर्जी, परमाणु ऊर्जा और ग्रीन हाइड्रोजन समाधान जैसे नए व्यापारिक क्षेत्रों में भी विस्तार किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि NETRA की यह पहल भारत में स्वच्छ हाइड्रोजन ईको-सिस्टम को तेज़ी से आगे बढ़ाएगी और हरित ईंधन उत्पादन में एक नए युग की शुरुआत करेगी।





