भारतीय परिवारों के पास मौजूद सोने की कीमतें एक दशक से कुछ अधिक समय में 1 ट्रिलियन डॉलर से अधिक बढ़ी - niveshvani.in

भारतीय परिवारों के पास मौजूद सोने की कीमतें एक दशक से कुछ अधिक समय में 1 ट्रिलियन डॉलर से अधिक बढ़ी

लेखक : सचिन सावरिकर, मैनेजिंग पार्टनर, 7,000 करोड़ रुपये AUM वाली अर्थ भारत इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स आईएफएससी एलएलपी

 

भले ही डि बीयर्स कंपनी ने विज्ञापनों के जरिए हीरे (डायमंड) को महिलाओं का सबसे अच्छा दोस्त बताया हो, लेकिन भारतीय महिलाओं के दिलों पर हमेशा से सोने (गोल्ड) का ही राज रहा है। सोना सिर्फ गहने के तौर पर पहनने या सामाजिक हैसियत दिखाने का साधन नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा एसेट क्लास है, जिसकी कीमत समय के साथ घटती नहीं, जिस तरह से महंगी कार या नया आईफोन मॉडल की कीमत समय के साथ कम होती है। इसी वजह से सोने ने भारतीय परिवारों की संपत्ति बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाई है।

 

वेल्थ क्रिएशन: 2011 से अब तक 792 अरब डॉलर की बढ़ोतरी

 

साल 2011 से 2024 के बीच भारत ने बहुत बड़ी मात्रा में सोने का आयात (इंपोर्ट) किया। शुरुआत में इस आयात की वजह से देश के व्यापार घाटे (ट्रेड डेफिसिट) पर दबाव पड़ा, लेकिन आज उन गोल्ड होल्डिंग्स की डॉलर में कीमत बहुत जबरदस्त तरीके से बढ़ गई है। मौजूदा कीमतों (करीब 4,211 डॉलर प्रति औंस) पर देखें तो इस अवधि में आयात किए गए सोने की कीमत में करीब 1.085 ट्रिलियन डॉलर की बढ़ोतरी हुई है, यानी कुल मिलाकर लगभग 175% का रिटर्न।

 

सोने की कीमत में हुआ यह इजाफा भारत के वर्तमान विदेशी मुद्रा भंडार (फॉरेक्स रिजर्व) से भी अधिक है। यह दिखाता है कि सोना, किसी की दौलत को सुरक्षित रखने और बढ़ाने का कितना बड़ा जरिया है। 2011 के बाद से भारत द्वारा आयात किए गए सोने की मौजूदा कुल कीमत करीब 1.6 ट्रिलियन डॉलर (1.6 लाख करोड़ डॉलर) तक पहुंच चुकी है। सिर्फ 2024 में जो सोना 52 बिलियन डॉलर में खरीदा गया था, उसकी कीमत अब बढ़कर 108 बिलियन डॉलर से ज्यादा हो गई है।

 

यह साफ तौर पर बताता है कि सोना लंबे समय तक दौलत बनाने की जबरदस्त क्षमता रखता है। हैरानी की बात यह है कि उस दौर में कई बाजार विशेषज्ञ सोने की खरीद से फॉरेक्स रिजर्व और ट्रेड डेफिसिट पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंतित थे, लेकिन वे यह नहीं समझ पाए कि यह सोना आगे चलकर इतनी बड़ी वेल्थ क्रिएशन करेगा।

 

ज्वैलरी का निर्यात और ग्लोबल ज्वेलरी हब के रूप में भारत

 

यहां यह ध्यान रखना भी जरूरी है कि भारत जो सोना विदेशों से मंगवाता है, उसका एक हिस्सा ज्वैलरी बनाकर वापस दूसरे देशों को बेच (एक्सपोर्ट) दिया जाता है। यह भारत की बेहतरीन कारीगरी और व्यापारिक कुशलता को दर्शाता है, जिसने भारत को दुनिया का एक बड़ा ‘ज्वैलरी हब’ बना दिया है।

 

भले ही कुछ सोना निर्यात हो जाता है, लेकिन फिर भी भारत के पास सोने का इतना बड़ा भंडार बचा रहता है जो भारतीय परिवारों और संस्थानों के लिए आर्थिक सुरक्षा की एक मजबूत दीवार की तरह काम करता है।

 

भारतीय परिवारों के पास 25,000–30,000 टन सोना

 

अनुमान के मुताबिक, भारतीय परिवारों के पास कुल मिलाकर करीब 25,000 से 30,000 टन सोना मौजूद है, जो दुनिया में निजी तौर पर रखे गए सोने के सबसे बड़े भंडारों में से एक है। मौजूदा कीमतों पर इसकी कुल कीमत लगभग 3.4 ट्रिलियन डॉलर से 4.1 ट्रिलियन डॉलर के बीच बैठती है। इससे साफ है कि भारत में घरों की संपत्ति में सोना सबसे अहम हिस्सों में से एक है। यही वजह है कि सोना आज भी भारतीय संस्कृति, बचत और निवेश में केंद्रीय भूमिका निभाता है।

 

2025 रहा ब्लॉकबस्टर, 2026 को लेकर भी मजबूत उम्मीदें

 

2025 में सोने ने जबरदस्त प्रदर्शन किया। इसकी बड़ी वजहें रहीं जियो-पॉलिटिकल टेंशन, बढ़ती महंगाई को लेकर चिंता और केंद्रीय बैंकों की लगातार खरीदारी। भारतीय निवेशकों के लिए यह साल खास तौर पर फायदेमंद रहा, क्योंकि सोने की कीमतों में तेज उछाल आया और एक बार फिर यह साबित हुआ कि सोना सुरक्षित निवेश और दौलत बचाने का भरोसेमंद जरिया है।

 

ग्लोबल स्तर पर आर्थिक अनिश्चितता ने सोने को सपोर्ट दिया, वहीं भारत में त्योहारों, शादियों और निवेश की लगातार मांग ने इसकी तेजी को बनाए रखा।

 

2026 के लिए अनुमान: कैसा रहेगा सोने का भविष्य?

 

आने वाले साल 2026 की बात करें, तो सोने का भविष्य अच्छा दिख रहा है, लेकिन इसमें कुछ उतार-चढ़ाव भी हो सकते हैं। सोने की कीमतें मुख्य रूप से कुछ बातों पर निर्भर करेंगी, जैसे केंद्रीय बैंकों की मौद्रिक नीतियां, करेंसी में उतार-चढ़ाव और महंगाई का रुझान यह तय करेंगे कि सोने की कीमतें किस दिशा में जाती हैं।

 

अगर महंगाई उम्मीद से ज्यादा बढ़ती है, तो सोने की मांग बनी रहेगी। सोना हमारी ‘खरीदने की ताकत’ (परचेजिंग पावर) को घटने से बचाता है।  दूसरी ओर, अगर बैंक ब्याज दरों में बहुत ज्यादा बढ़ोतरी करते हैं, तो थोड़े समय के लिए सोने की कीमतों पर दबाव आ सकता है। फिर भी, लंबे समय के लिए निवेश के नजरिए से सोना एक सुरक्षित विकल्प बना रहेगा।

 

इसके अलावा, जियो-पॉलिटिकल टेंशन और वित्तीय बाजारों में उतार-चढ़ाव भी सोने की सुरक्षित निवेश के रूप में मांग को लगातार सपोर्ट देते रहेंगे। कुल मिलाकर, सोना न केवल एक निवेश है, बल्कि मुसीबत के समय काम आने वाला एक भरोसेमंद साथी भी बना रहेगा।

 

पोर्टफोलियो में कितना रखें सोना : 5 – 10% की सलाह

 

पोर्टफोलियो में सोने की हिस्सेदारी को लेकर फाइनेंशियल प्लानर आमतौर पर 5% से 10% तक सोना रखने की सलाह देते हैं। इससे सोना एक तरफ महंगाई से बचाव और स्थिरता देता है, वहीं दूसरी तरफ शेयर जैसे ग्रोथ वाले निवेशों के साथ संतुलन भी बना रहता है।

 

जिन निवेशकों के पास पहले से काफी मात्रा में फिजिकल गोल्ड है, वे गोल्ड फंड या गोल्ड ETF के जरिए निवेश को और बेहतर तरीके से डाइवर्सिफाई कर सकते हैं। इससे लिक्विडिटी बढ़ती है और मैनेजमेंट आसान होता है। कुल मिलाकर, पूंजी की सुरक्षा, महंगाई से बचाव और संकट के समय मजबूती जैसी खूबियों की वजह से सोना एक संतुलित निवेश रणनीति का जरूरी हिस्सा बना रहता है।

 

गिफ्ट सिटी के जरिए निवेश के नए मौके

 

2026 में सोने में निवेश का प्लान है तो कई विकल्प उपलब्ध हैं। भारतीय निवेशक सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड, गोल्ड ETF और डिजिटल गोल्ड में निवेश कर सकते हैं, जिनमें लिक्विडिटी, सुविधा और टैक्स से जुड़े फायदे मिलते हैं। इनमें से पहले 2 विकल्प अच्छी तरह से रेगुलेटेड हैं, जबकि डिजिटल गोल्ड को लेकर निवेशकों को थोड़ा सतर्क रहने की जरूरत होती है।

 

अब तक निवेशक गिफ्ट सिटी के जरिए इंटरनेशनल गोल्ड फंड्स, चाहे पैसिव हों या एक्टिव, में निवेश नहीं कर पा रहे थे, जो अमेरिकी डॉलर जैसी हार्ड करेंसी और अंतरराष्ट्रीय गोल्ड प्राइस से जुड़े रिटर्न देते हैं।

 

लेकिन अब गिफ्ट सिटी के रेगुलेटर आईएफएससीए (IFSCA) द्वारा नियमों में बदलाव के बाद, लाइसेंस प्राप्त फंड मैनेजमेंट कंपनियां सोने जैसे कीमती धातुओं में निवेश करने वाली स्कीम लॉन्च कर सकती हैं। जल्द ही निवेशकों को गिफ्ट सिटी में रजिस्टर्ड गोल्ड फंड्स के नए और आकर्षक विकल्प मिलेंगे। इनके जरिए एनआरआई और रेजिडेंट इंडियन निवेशक पारदर्शी और ग्लोबल स्टैंडर्ड वाले, फिजिकल गोल्ड से समर्थित प्रोफेशनली मैनेज्ड फंड्स में रेगुलेटेड प्लेटफॉर्म के माध्यम से निवेश कर सकेंगे।

 

जैसे-जैसे साल 2026 आगे बढ़ेगा, भारतीय निवेशकों को यह उम्मीद रखनी चाहिए कि बदलते आर्थिक हालात के बीच सोना अपनी रणनीतिक अहमियत बनाए रखेगा। भले ही कीमतों में उतार-चढ़ाव आना तय हो, लेकिन सांस्कृतिक महत्व, वैश्विक आर्थिक हालात और कई साल में जमा हुई इसकी बड़ी वैल्यू की वजह से सोना, निवेशकों की दौलत को सुरक्षित रखने और पोर्टफोलियो को संतुलित करने का अहम जरिया बना रहेगा। पारंपरिक तरीके से रखे गए सोने के साथ-साथ आधुनिक निवेश विकल्पों का सही इस्तेमाल करने से निवेशक रिटर्न बेहतर कर सकते हैं और जोखिम को भी अच्छी तरह संभाल सकते हैं।

  • Abhishek Sinha

    Abhishek Sinha is a young and dynamic journalist with 2 years of experience in business news reporting and analysis. Over this period, he has developed strong expertise in covering stock markets, corporate developments, IPOs, economic policies, and sector-specific trends.

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