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ESG निवेश की दूसरी पारी

लेखक: जितेंद्र श्रीराम, सीनियर फंड मैनेजर (इक्विटी), बड़ौदा बीएनपी परिबा म्यूचुअल फंड

तेजी से बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था में निवेश का नजरिया भी बदल रहा है। अब केवल बैलेंस शीट और मुनाफा ही निवेश का आधार नहीं रह गया है, बल्कि कंपनियों के काम करने के तरीके, पर्यावरण के प्रति उनकी जिम्मेदारी और कॉरपोरेट गवर्नेंस भी निवेश निर्णयों का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं। इसी सोच से जुड़ा है — ईएसजी (Environmental, Social, Governance) निवेश, जो अब निवेश की दूसरी पारी में प्रवेश करता दिख रहा है।

ईएसजी निवेश दरअसल कंपनियों से जुड़े उन गैर-वित्तीय जोखिमों को समझने का तरीका है, जो पारंपरिक वित्तीय विश्लेषण में अक्सर नजरअंदाज हो जाते हैं। ये जोखिम भविष्य में निवेश को प्रभावित कर सकते हैं — जैसे पर्यावरणीय मुकदमे, श्रम कानूनों का उल्लंघन या प्रबंधन में पारदर्शिता की कमी। इन पहलुओं को ध्यान में रखकर किया गया निवेश लंबे समय में स्थिर और बेहतर रिटर्न देने की क्षमता रखता है।

हालांकि अमेरिका में राजनीतिक बदलावों के कारण ईएसजी को लेकर कुछ हद तक पुनर्विचार देखने को मिल रहा है, लेकिन यूरोप, एशिया और अफ्रीका जैसे क्षेत्र इसे नजरअंदाज नहीं कर सकते। जलवायु परिवर्तन का सीधा असर झेल रहे ये देश अब सतत विकास और जिम्मेदार निवेश को प्राथमिकता दे रहे हैं। यही वजह है कि दुनिया का बड़ा हिस्सा पारंपरिक कारोबारी मॉडल की ओर लौटने के बजाय ईएसजी को अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

ईएसजी निवेश का मूल सिद्धांत सरल है — निवेश करते समय पर्यावरण, सामाजिक जिम्मेदारी और कॉरपोरेट गवर्नेंस जैसे कारकों को शामिल करना। इसका उद्देश्य सिर्फ मुनाफा कमाना नहीं, बल्कि जोखिम को संतुलित करते हुए टिकाऊ विकास सुनिश्चित करना है।

भारत में भी ईएसजी को मजबूत नीतिगत समर्थन मिला है। बाजार नियामक सेबी ने मार्केट कैपिटलाइजेशन के आधार पर शीर्ष 1000 कंपनियों के लिए अपनी ईएसजी गतिविधियों की वार्षिक रिपोर्टिंग अनिवार्य कर दी है। इसके अलावा कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग स्कीम, नेशनल सोलर मिशन और एक्सटेंडेड प्रोड्यूसर रिस्पांसिबिलिटी जैसे सरकारी कदमों ने पर्यावरण-संवेदनशील कारोबारी ढांचे को बढ़ावा दिया है।

वैश्विक स्तर पर भी बदलाव स्पष्ट है। पिछले एक दशक में क्लीन एनर्जी पर निवेश, फॉसिल फ्यूल में किए गए निवेश से अधिक रहा है — जो निवेशकों की बदलती प्राथमिकताओं को दर्शाता है।

भारतीय बाजार में भी ईएसजी का प्रभाव दिखाई देने लगा है। दिसंबर 2025 तक निफ्टी 100 ईएसजी इंडेक्स ने एक साल के आधार पर निफ्टी 100 और निफ्टी 500 दोनों से बेहतर प्रदर्शन किया। समान मूल्यांकन स्तर (PE) पर भी इस इंडेक्स से जुड़ी कंपनियों ने मुनाफे में अधिक वृद्धि दर्ज की।

पारंपरिक थीमैटिक निवेश जहां किसी एक सेक्टर या थीम पर केंद्रित होता है, वहीं ईएसजी निवेश का दृष्टिकोण व्यापक होता है। यह विभिन्न सेक्टरों में उन कंपनियों को चुनता है, जो जिम्मेदार कारोबारी मानकों का पालन करती हैं। इससे निवेश में विविधता बनी रहती है और मजबूत प्रबंधन वाली कंपनियों में हिस्सेदारी बढ़ती है।

आज के अनिश्चित और तेजी से बदलते निवेश माहौल में ईएसजी फंड ऐसे अवसर प्रदान करते हैं, जहां निवेशक न केवल संभावित रिटर्न की तलाश कर सकते हैं, बल्कि टिकाऊ और जिम्मेदार विकास का हिस्सा भी बन सकते हैं। यही वजह है कि ईएसजी निवेश अब एक विकल्प नहीं, बल्कि निवेश की नई दिशा बनता जा रहा है।

  • Abhishek Sinha

    Abhishek Sinha is a young and dynamic journalist with 2 years of experience in business news reporting and analysis. Over this period, he has developed strong expertise in covering stock markets, corporate developments, IPOs, economic policies, and sector-specific trends.

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