पटना। आपातकालीन परिस्थितियों में मरीजों को तुरंत और प्रभावी चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने में क्रैश कार्ड की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इसी विषय पर आईजीआईएमएस पटना स्थित नेल्स स्किल सेंटर में तीन दिवसीय ट्रेनिंग कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें चिकित्सकों, नर्सों और पैरामेडिकल स्टाफ को आपदा की स्थिति में मरीजों की जान बचाने के उन्नत प्रोटोकॉल और जीवन-रक्षक प्रक्रियाओं का प्रशिक्षण दिया गया।
प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों ने बताया कि दुर्घटना, हार्ट अरेस्ट, रक्तस्राव, श्वसन विफलता, गिरते हुए बायो-पैरामीटर्स और अन्य गंभीर परिस्थितियों में क्रैश कार्ड मेडिकल टीम के लिए अत्यंत उपयोगी साबित होता है। यह कार्ड एक विशेष रूप से तैयार किया गया मोबाइल ट्रॉली जैसा तंत्र होता है, जिसमें जीवन-रक्षक दवाओं से लेकर अत्याधुनिक उपकरण और आपातकालीन मशीनें सुव्यवस्थित रूप से रखी होती हैं, ताकि सेकंडों के भीतर उपचार शुरू किया जा सके।
विशेषज्ञों के अनुसार, क्रैश कार्ड की उपलब्धता डॉक्टरों और नर्सों को तत्काल निर्णय लेने और कार्यवाही करने में सक्षम बनाती है। बड़ी संख्या में अस्पतालों में इस प्रणाली का उपयोग तो होता है, लेकिन इसके सही और समयबद्ध उपयोग के अभाव में कई मरीजों की जान बचाना संभव नहीं हो पाता। यही कारण है कि चिकित्सा संस्थानों में कार्यरत नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टाफ को समय-समय पर इस प्रकार का प्रशिक्षण दिया जाना अनिवार्य माना गया है।
तीन दिवसीय प्रशिक्षण में विभिन्न मेडिकल कॉलेजों एवं संस्थानों से कुल 29 प्रशिक्षुओं ने भाग लिया। प्रतिभागियों को जीवन-रक्षक तकनीकों, टीम-कोऑर्डिनेशन, उपकरण संचालन, आपातकालीन स्थिति में सही प्रोटोकॉल और क्रैश कार्ड के प्रभावी उपयोग के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान की गई।
कार्यक्रम में शामिल प्रशिक्षुओं ने माना कि इस ट्रेनिंग ने उन्हें वास्तविक आपातकालीन परिस्थितियों के लिए बेहतर ढंग से तैयार किया है, और इस ज्ञान का सीधा लाभ अस्पतालों में भर्ती गंभीर मरीजों को मिलेगा।
आईजीआईएमएस के नेल्स स्किल सेंटर द्वारा आयोजित यह प्रशिक्षण स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता, गति और आपातकालीन प्रतिक्रिया क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पूरे देश के अस्पतालों में क्रैश कार्ड के प्रोटोकॉल का व्यवस्थित और अनिवार्य रूप से पालन किया जाए, तो आपातकालीन परिस्थितियों में मरने वाले मरीजों की संख्या में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।





