मुंबई/पुणे, 4 नवंबर 2025 — देश की प्रमुख नॉन-बैंकिंग वित्तीय संस्था बजाज फाइनेंस लिमिटेड ने इस त्योहारी सीजन में रिकॉर्ड तोड़ उपभोक्ता मांग दर्ज की है। कंपनी ने बताया कि पिछले साल की तुलना में इस बार 27% अधिक लोन और 29% अधिक मूल्य के उपभोक्ता कर्ज वितरित किए गए।
सरकार के जीएसटी सुधारों और आयकर दरों में कटौती से उपभोक्ताओं की क्रय शक्ति (purchasing power) बढ़ी है, जिससे त्योहारी खरीदारी और कर्ज की मांग में उछाल देखने को मिला।
📊 मुख्य आंकड़े
- फेस्टिव पीरियड (22 सितंबर – 26 अक्टूबर 2025) में बजाज फाइनेंस ने 63 लाख लोन वितरित किए।
- कंपनी ने इस दौरान 23 लाख नए ग्राहक जोड़े, जिनमें से 52% न्यू-टू-क्रेडिट यानी पहली बार लोन लेने वाले थे।
- कंपनी की यह वृद्धि वित्तीय समावेशन (financial inclusion) को नई दिशा देती है।
💬 कंपनी का बयान
चेयरमैन संजीव बजाज ने कहा —
“जीएसटी और आयकर में सुधारों ने भारत की उपभोग-आधारित विकास यात्रा को नई ऊर्जा दी है। इस त्योहारी सीजन में लाखों मध्यम और निम्न आय वर्गीय परिवार आत्मविश्वास के साथ खरीदारी कर रहे हैं। नतीजा यह रहा कि न सिर्फ लोन वितरण 27% बढ़ा, बल्कि उपभोक्ताओं का रुझान प्रीमियम प्रोडक्ट्स की ओर भी बढ़ा है।”
उन्होंने आगे कहा कि डिजिटल सेवाओं और देशभर के 4,200 लोकेशन्स व 2.39 लाख वितरण केंद्रों के जरिये कंपनी वित्तीय पहुँच को गहराई दे रही है।
🖥️ टीवी और एसी की बिक्री में उछाल
कम जीएसटी दरों और बेहतर फाइनेंसिंग विकल्पों ने उपभोक्ताओं को प्रीमियम प्रोडक्ट्स की ओर शिफ्ट होने में मदद की है।
- टीवी लोन में 40 इंच या उससे अधिक स्क्रीन साइज वाले मॉडलों की हिस्सेदारी अब 71% हो गई है (पिछले साल 67% थी)।
- औसत टिकट साइज 6% कम हुआ, जिससे अधिक उपभोक्ताओं को उन्नत प्रोडक्ट्स खरीदने का मौका मिला।
🌍 डिजिटल फाइनेंसिंग का विस्तार
बजाज फाइनेंस वर्तमान में 11 करोड़ ग्राहकों को सेवाएं दे रही है।
कंपनी का Bajaj Finserv App, जिसके 75.1 मिलियन नेट इंस्टॉल्स हैं, क्रेडिट, बीमा और निवेश जैसी सभी वित्तीय सुविधाएं एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराता है।
ग्राहक पारदर्शिता के लिए कंपनी अब 19 भाषाओं में ‘की फैक्ट स्टेटमेंट्स’ भी जारी करती है।
🇮🇳 जीएसटी सुधारों का असर
सितंबर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किया गया “जीएसटी बचत उत्सव” उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ा राहत कदम साबित हुआ है।
सरल टैक्स ढांचे और आयकर दरों में कमी ने भारतीय परिवारों की क्रय शक्ति को मजबूत किया है और समावेशी विकास (inclusive growth) की दिशा में भारत को नई गति दी है।





