सीपीआर से बचाई जा सकती हैं कार्डियक अरेस्ट से होने वाली अधिकांश मौतें: विशेषज्ञों ने कहा—“समय पर सही कार्रवाई ही जीवन बचाती है”

देश में अचानक कार्डियक अरेस्ट के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, और कोविड महामारी के बाद यह समस्या युवाओं में भी तेजी से बढ़ी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, समय पर सीपीआर (Cardio Pulmonary Resuscitation) दिए जाने से मरीज की जान बचाने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि कार्डियक अरेस्ट के बाद शुरुआती मिनट बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। यदि मरीज को तुरंत मदद मिले और अस्पताल तक जल्दी पहुंचाया जाए, तो उसके बचने की संभावना काफी अधिक रहती है। कई अनुभवी डॉक्टरों ने बताया कि समय पर सीपीआर दिए जाने से जीवित बचने की दर 50% तक बढ़ जाती है, जबकि भारत में यह दर अभी 1.3% से 9.8% के बीच बताई गई है। वहीं विकसित देशों में यह दर 62% तक पहुंच चुकी है, जो भारत में जागरूकता और प्रशिक्षण की जरूरत को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।


सीपीआर क्यों आवश्यक है?

  • भारत में कार्डियक अरेस्ट की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं।

  • अस्पताल पहुंचने से पहले की स्थिति सबसे निर्णायक होती है।

  • यदि राहगीर, नर्स, स्टाफ या आसपास मौजूद कोई भी व्यक्ति सीपीआर देना जानता हो, तो मरीज के बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।

विशेषज्ञों का जोर है कि देश में आम लोगों को भी बेसिक लाइफ सपोर्ट और सीपीआर का प्रशिक्षण देना बेहद जरूरी हो गया है।


पटना में बड़े पैमाने पर सीपीआर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित

इन चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए पटना में एक व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें:

  • विभिन्न मेडिकल और नर्सिंग कॉलेजों के प्रशिक्षु

  • अस्पतालों के पैरामेडिकल स्टाफ

  • कार्डियक नर्सिंग और इमरजेंसी विभाग से जुड़े कर्मचारी

बड़ी संख्या में शामिल हुए। इस कार्यक्रम में लगभग 300 नर्सों को आपातकालीन चिकित्सा और सीपीआर प्रक्रियाओं का प्रशिक्षण दिया गया।

प्रशिक्षण सत्र में मॉक ड्रिल, टीमवर्क, त्वरित प्रतिक्रिया, नेतृत्व क्षमता और संकट की घड़ी में निर्णय लेने जैसे कौशलों का वास्तविक अभ्यास कराया गया। प्रतिभागियों ने आपात स्थितियों के दौरान सही तकनीकों का उपयोग करके उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।


प्रशिक्षण का उद्देश्य: समाज को तैयार करना

कार्यक्रम आयोजकों के अनुसार:

  • असली लक्ष्य यह है कि आम लोगों को भी अचानक आने वाली मेडिकल आपात स्थितियों से निपटने में सक्षम बनाया जाए।

  • कई हादसों में लोगों की जान इसलिए चली जाती है क्योंकि शुरुआती कुछ मिनटों में सही मदद नहीं मिल पाती।

  • प्रशिक्षण का मुख्य फोकस यह था कि कोई भी व्यक्ति स्थिति को पहचान सके, घबराए नहीं और तुरंत सीपीआर शुरू कर सके।

विशेषज्ञों ने बताया कि ऐसी ट्रेनिंग न केवल अस्पतालों की क्षमता बढ़ाती है, बल्कि पूरे समाज को अधिक सुरक्षित बनाती है।


नर्सें—स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़

प्रशिक्षण के दौरान यह भी बताया गया कि भारतीय स्वास्थ्य व्यवस्था में नर्सों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है।
आपात स्थितियों में:

  • मरीज की स्थिति का त्वरित मूल्यांकन

  • चेस्ट कम्प्रेशन

  • एयरवे मैनेजमेंट

  • बेसिक लाइफ सपोर्ट

जैसी सेवाएं बहुत हद तक नर्सें ही संभालती हैं। इसलिए उन्हें लगातार अपडेटेड प्रशिक्षण मिलना बेहद जरूरी है।


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