मुंबई, 28 नवंबर 2025: वित्तीय सेवा प्रदाता इक्विरस सिक्योरिटीज़ ने अपनी नई इंडिया इक्विटी स्ट्रैटेजी रिपोर्ट जारी करते हुए कहा है कि हाल की गिरावट के बाद भारतीय शेयर बाज़ार का वैल्यूएशन अपने पुराने ऊंचे स्तर से नीचे आया है, जिससे भारत, उभरते बाज़ारों (EM) और ग्लोबल वैल्यूएशन के बीच का अंतर काफी कम हो गया है। रिपोर्ट के अनुसार आगे निफ्टी 18–22 गुना PE रेंज में ट्रेड कर सकता है, जो कोविड के बाद के चरण जैसा है।
रिपोर्ट में ऑटो, बैंकिंग, कैपिटल मार्केट, FMCG, इंटरनेट प्लेटफॉर्म और ऑयल–गैस सेक्टर को ओवरवेट रेटिंग दी गई है, जबकि बिल्डिंग मटीरियल, इंडस्ट्रियल्स एवं डिफेंस, रियल एस्टेट, टेक्सटाइल और लॉजिस्टिक्स पर कमजोर दृष्टिकोण रखा गया है। सीमेंट, केमिकल्स, कंज़्यूमर ड्यूरेबल्स, EMS, इंफ्रा, आईटी सर्विसेज़, मेटल्स–माइनिंग, NBFCs, हेल्थकेयर और रिटेल को न्यूट्रल रुख में रखा गया है।
“इंडिया एंटी–AI ट्रेड”: घरेलू पूंजी ने बाज़ार को मजबूती दी
रिपोर्ट बताती है कि भारत में घरेलू संस्थागत निवेशक (DII) निरंतर निवेश बढ़ा रहे हैं, जिससे बाजार को स्थिरता और सपोर्ट मिल रहा है। SIP निवेश 27% CAGR की तेज़ रफ्तार से बढ़ रहा है और DII हिस्सेदारी बढ़कर 18.6% पहुंच गई है, जो FII हिस्सेदारी 16.9% से अधिक है। इसके विपरीत, दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे देशों को FII प्रवाह में बढ़त मिली है क्योंकि वहां AI–से जुड़े व्यवसायों में बड़े निवेश हुए। भारत में AI निवेश के सीमित अवसरों के कारण यहां वैसा उत्साह नहीं दिखा।
कमाई ही अब बड़ा बाजार ड्राइवर
रिपोर्ट के अनुसार CY26–CY27 के दौरान निफ्टी–50 की कमाई लगभग 17–14% बढ़ने की उम्मीद है। चूंकि वैल्यूएशन पहले से ऊंचा है, इसलिए आगे रिटर्न सिर्फ कमाई की मजबूती पर निर्भर होगा। CY25 के लिए EPS अनुमान में पहले 13% कटौती की गई थी, लेकिन मौजूदा संकेत बेहतर नतीजों की संभावना दिखा रहे हैं—अगर ऐसा हुआ तो EPS उछाल बाजार के लिए बड़ा पॉज़िटिव ट्रिगर बन सकता है।
वैल्यूएशन में नरमी आई, लेकिन जोखिम खत्म नहीं
लार्ज कैप कंपनियों का वैल्यूएशन कोविड–पीक से नीचे जरूर आया है, लेकिन जहां तक लंबी अवधि के औसत की बात है—बाज़ार अभी भी महंगा है। स्मॉल कैप सेक्टर और अधिक खिंचा हुआ है — स्मॉल/लार्ज PE रेशियो 1.25x है जबकि दीर्घकालिक औसत 0.9x है। रिपोर्ट के अनुसार कमज़ोर नतीजों की स्थिति में स्मॉल–कैप में गिरावट का जोखिम सबसे अधिक है।
रिपोर्ट यह भी बताती है कि आज भी NSE–500 की 36% कंपनियां 50x से अधिक P/E पर ट्रेड कर रही हैं, जबकि कोविड से पहले यह आंकड़ा मात्र 16% था। इसका संकेत है कि बाज़ार में तेज़ी धीमी पड़ी है—but valuations remain elevated.
पॉज़िटिव संकेत: कच्चे तेल में राहत और ग्रामीण मांग
भारत को इस समय कच्चे तेल की स्थिर व कम कीमतों (63–70 USD/बैरल) से लाभ मिल रहा है—इसका फायदा ऑयल मार्केटिंग कंपनियों, केमिकल्स और ट्रांसपोर्ट जैसी इंडस्ट्रीज को मिल रहा है। ग्रामीण मांग भी बढ़ रही है, जिसे बेहतर रिज़र्वायर स्तर और उपभोक्ता विश्वास समर्थन दे रहे हैं।
बाहरी दबाव: US टैरिफ नीति
अमेरिका की टैरिफ नीति से मई 2025 के बाद भारत के निर्यात में करीब 40% गिरावट आई है, खासकर टेक्सटाइल सेक्टर में असर अधिक रहा। हालांकि भारत बाजारों को विविध देशों में फैलाकर नुकसान सीमित करने की कोशिश कर रहा है।
निष्कर्ष
इक्विरस सिक्योरिटीज़ के अनुसार भारतीय बाजार के लिए आगे का रास्ता कमाई–आधारित है। वैल्यूएशन बढ़ाकर बाज़ार ऊपर ले जाना अब मुश्किल होगा—रिटर्न अब सिर्फ मजबूत व्यवसायिक नतीजों से ही आएगा। लार्ज कैप अपेक्षाकृत सुरक्षित और आकर्षक माने गए हैं, जबकि स्मॉल और हाई वैल्यूएशन शेयरों में जोखिम ज्यादा है।





