आईसीआईसीआई लोम्बार्ड और आईआरएम इंडिया एफिलिएट ने जारी की तीसरी इंडिया रिस्क रिपोर्ट 2025 — तकनीकी और भू-राजनीतिक बदलावों के दौर में ‘बिल्डिंग रेजिलियंस’ पर फोकस - niveshvani.in

आईसीआईसीआई लोम्बार्ड और आईआरएम इंडिया एफिलिएट ने जारी की तीसरी इंडिया रिस्क रिपोर्ट 2025 — तकनीकी और भू-राजनीतिक बदलावों के दौर में ‘बिल्डिंग रेजिलियंस’ पर फोकस

मुंबई, 18 नवंबर 2025:
बदलते वैश्विक परिदृश्य में तकनीकी अस्थिरता, भू-राजनीतिक अनिश्चितता और बढ़ते साइबर खतरों के बीच भारतीय संगठनों के लिए लचीलापन (Resilience) पहले से कहीं अधिक अहम हो गया है।

आईसीआईसीआई लोम्बार्ड जनरल इंश्योरेंस और इंस्टीट्यूट ऑफ रिस्क मैनेजमेंट (IRM) – इंडिया एफिलिएट ने आज “इंडिया रिस्क रिपोर्ट 2025” का तीसरा संस्करण जारी किया, जो बताता है कि कैसे डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और ग्लोबल रीअलाइनमेंट भारत के रिस्क लैंडस्केप को नया आकार दे रहे हैं।

रिपोर्ट इस बात पर जोर देती है कि “विकसित भारत 2047” के लक्ष्य की दिशा में बढ़ते हुए भारतीय एंटरप्राइजेस को टेक्नोलॉजी, गवर्नेंस और एथिकल लीडरशिप को अपने रिस्क मैनेजमेंट फ्रेमवर्क में एकीकृत करने की जरूरत है।


📊 मुख्य निष्कर्ष (Key Findings):

🔸 रिस्क परसेप्शन

  • लगातार तीसरे वर्ष साइबर रिस्क शॉर्ट-टर्म रैंकिंग में शीर्ष पर रहा, इसके बाद कानूनी/रेगुलेटरी और टैलेंट रिस्क का स्थान रहा।

  • ट्रेड वॉर और ग्लोबल रीअलाइनमेंट जैसे उभरते जोखिम 2025 के प्रमुख दीर्घकालिक जोखिमों में शामिल हैं।

🔸 प्रोसेस बनाम कल्चर मैच्योरिटी

  • संगठनों में रिस्क मैनेजमेंट प्रोसेस की परिपक्वता बढ़ रही है, लेकिन रिस्क कल्चर अब भी पीछे है।

  • केवल 12% संगठन ऐसे हैं जो हाई प्रोसेस और हाई कल्चर मैच्योरिटी दोनों प्रदर्शित करते हैं।

  • “नियर-मिसेस” या रिस्क घटनाओं से सीखने की प्रवृत्ति अभी सीमित है।

🔸 रिस्क से अवसर की दिशा में बदलाव

  • 80% से अधिक संगठनों ने माना कि टेक्नोलॉजी अपनाने से प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त और लागत लाभ मिला है।

  • 60–70% संगठनों ने कहा कि बदलती व्यापारिक परिस्थितियाँ उनके लिए बाज़ार विस्तार के नए अवसर ला रही हैं।

🔸 सेक्टोरल अंतर

  • BFSI, सर्विसेज और लॉजिस्टिक्स सेक्टर साइबर रिस्क को प्राथमिकता दे रहे हैं।

  • मैन्युफैक्चरिंग, कंस्ट्रक्शन और फार्मा सेक्टर सप्लाई चेन रुकावटों को लेकर चिंतित हैं।

  • एनर्जी और ऑयल सेक्टर में भू-राजनीतिक जोखिम शीर्ष पर हैं।

  • स्टार्ट-अप्स और MSMEs अधिकतर टेक्नोलॉजी और फंडिंग रिस्क को अहम मानते हैं।


🗣️ आईसीआईसीआई लोम्बार्ड के संदीप गोराडिया का बयान

“भारत में विकसित हो रहा रिस्क कल्चर हमारी आर्थिक परिपक्वता और जुझारूपन को दर्शाता है। आज उद्योग साइबर सिक्योरिटी, आर्थिक अनिश्चितता और भू-राजनीतिक बदलावों को केवल जोखिम नहीं, बल्कि रणनीतिक अवसरों के रूप में देखने लगे हैं। बीमा इस परिवर्तन का महत्वपूर्ण आधार है, जो संगठनों को आत्मविश्वास के साथ अनिश्चितताओं का सामना करने में सक्षम बनाता है।”


🗣️ आईआरएम इंडिया एफिलिएट के सीईओ हर्ष शाह ने कहा:

“यह रिपोर्ट इस बात पर केंद्रित है कि संगठन डेटा-ड्रिवन, एथिकल और इनोवेटिव रिस्क कल्चर कैसे विकसित कर सकते हैं। आने वाले दशक में वही संगठन सफल होंगे जो रिस्क को खतरा नहीं, बल्कि नवाचार और वैल्यू क्रिएशन के उत्प्रेरक के रूप में देखेंगे।”


⚙️ रिस्क मैनेजमेंट पर रिपोर्ट के इनसाइट्स

  • रिस्क कल्चर को मजबूत बनाने के लिए शीर्ष नेतृत्व की सक्रिय भूमिका जरूरी है।

  • रिस्क आइडेंटिफिकेशन, कंट्रोल्स और बीमा रणनीति में सुधार हुआ है, लेकिन संगठन-व्यापी एक्शन में अभी दूरी बनी हुई है।

  • पारंपरिक जोखिमों (जैसे आग, साइबर, और डेटा ब्रेच) के मुकाबले तैयारी बेहतर है, लेकिन उभरते जोखिमों जैसे ट्रेड, जलवायु और टैलेंट रिस्क में अब भी कमी है।


📘 रिपोर्ट की कार्यप्रणाली (Methodology):

  • अगस्त 2025 में किए गए सर्वेक्षण में 650 संगठनों को टारगेट किया गया, जिनमें से 250 से अधिक प्रतिक्रियाएँ प्राप्त हुईं।

  • 55% उत्तरदाता CXOs स्तर के थे, जबकि 35% वरिष्ठ प्रबंधन से संबंधित थे।

  • रिपोर्ट में 10 से अधिक इंडस्ट्री लीडर्स और अंडरराइटिंग एक्सपर्ट्स के विश्लेषण शामिल हैं।


🧭 निष्कर्ष:

तीसरी इंडिया रिस्क रिपोर्ट 2025 बताती है कि भारत के संगठन अब जोखिम को केवल “प्रतिक्रिया” के रूप में नहीं, बल्कि रणनीतिक विकास, नवाचार और सस्टेनेबल वैल्यू क्रिएशन के अवसर के रूप में देखने लगे हैं।

रिस्क मैनेजमेंट का भविष्य उन संगठनों के हाथ में है जो लचीले, नैतिक और टेक्नोलॉजी-चालित दृष्टिकोण से अनिश्चितताओं को अवसर में बदलने की क्षमता रखते हैं।



Abhishek Sinha

Abhishek Sinha is a young and dynamic journalist with 2 years of experience in business news reporting and analysis. Over this period, he has developed strong expertise in covering stock markets, corporate developments, IPOs, economic policies, and sector-specific trends.

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