लेखक: अरिहंत जैन, पोर्टफोलियो मैनेजर, फ्रैंकलिन टेम्पलटन एसेट मैनेजमेंट (इंडिया)
क्या आपने कभी किसी ऑर्केस्ट्रा (संगीत मंडली) को सुना है?
कई म्यूज़िशियन अलग-अलग वाद्ययंत्र बजाते हैं — लेकिन जब सभी एक साथ मिलकर तालमेल में बजाते हैं, तो एक सुंदर सिम्फनी बनती है। हर इंस्ट्रूमेंट का अपना महत्व होता है, लेकिन सब मिलकर जो सामंजस्य रचते हैं, वही संगीत को उत्कृष्ट बनाता है।
निवेश की दुनिया में भी यही नियम लागू होता है।
पुरानी कहावत है —
“अपने सभी अंडे एक ही टोकरी में न रखें।”
यह कहावत इस बात पर ज़ोर देती है कि जोखिम (Risk) को कम करने के लिए निवेशों में डाइवर्सिफिकेशन (विविधता) जरूरी है।
🎯 डाइवर्सिफिकेशन का एक नया तरीका — मल्टी-फैक्टर इन्वेस्टिंग
डाइवर्सिफिकेशन कई तरीकों से किया जा सकता है —
जैसे कि अलग-अलग एसेट क्लास, सेक्टर, मार्केट कैप, या भौगोलिक क्षेत्रों में निवेश करके।
लेकिन निवेश की दुनिया में एक और प्रभावी तरीका है — फैक्टर्स (Factors) के आधार पर डाइवर्सिफाई करना, जिसे कहते हैं मल्टी-फैक्टर इन्वेस्टिंग।
🔍 फैक्टर्स क्या हैं?
फैक्टर्स वे विशेषताएँ होती हैं जो किसी शेयर या सिक्योरिटी के रिटर्न और रिस्क को प्रभावित करती हैं।
ये बताते हैं कि किसी कंपनी का स्टॉक दूसरों से अलग क्यों प्रदर्शन करता है।
🔹 1. क्वालिटी फैक्टर (Quality Factor)
ऐसी कंपनियां जिनकी कमाई स्थिर, कर्ज कम, और कैश फ्लो मजबूत होता है।
इनका व्यवसाय अनुमानित और स्थिर होता है, इसलिए ये कंपनियां बाजार के उतार-चढ़ाव में भी टिके रहती हैं।
🔹 2. वैल्यू फैक्टर (Value Factor)
कुछ कंपनियों के फंडामेंटल मजबूत होते हैं, लेकिन उनके शेयर बाजार में कम दाम पर ट्रेड होते हैं।
ऐसे स्टॉक्स जिनका P/E रेश्यो कम होता है, उन्हें वैल्यू स्टॉक्स कहा जाता है।
ये लंबी अवधि में अच्छा रिटर्न देने की क्षमता रखते हैं।
🔹 3. मोमेंटम फैक्टर (Momentum Factor)
यह उन स्टॉक्स पर केंद्रित होता है जो बाजार के साथ तेजी से ऊपर बढ़ते हैं।
मोमेंटम स्टॉक्स बुल मार्केट में शानदार प्रदर्शन करते हैं, लेकिन मंदी में इनकी वोलैटिलिटी (अस्थिरता) बढ़ जाती है।
📊 हर बाजार चक्र में हर फैक्टर नहीं चलता
किसी एक फैक्टर का प्रदर्शन हर समय समान नहीं रहता।
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तेज़ी के दौर में मोमेंटम फैक्टर अच्छा प्रदर्शन करता है।
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जबकि अनिश्चित बाजार में क्वालिटी फैक्टर अपेक्षाकृत बेहतर रिटर्न देता है।
उदाहरण के तौर पर —
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2020 के कोविड संकट में क्वालिटी स्टॉक्स ने सबसे अच्छा प्रदर्शन किया।
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2021 की रिकवरी में मोमेंटम स्टॉक्स ने बेहतर रिटर्न दिए।
जब बाजार की दिशा बदलने पर एक फैक्टर दूसरे को पीछे छोड़ देता है, तो इसे कहते हैं —
फैक्टर रोटेशन (Factor Rotation)।
💡 क्यों जरूरी है मल्टी-फैक्टर निवेश रणनीति?
अगर कोई निवेशक सिर्फ एक ही फैक्टर पर निर्भर रहता है, तो जिस समय वह फैक्टर कमजोर पड़ता है, उसके पोर्टफोलियो पर भी असर पड़ता है।
मल्टी-फैक्टर निवेश इस जोखिम को कम करता है, क्योंकि यह अलग-अलग फैक्टरों का संयोजन करके स्थिरता और ग्रोथ दोनों का संतुलन बनाता है।
⚙️ सक्रिय रूप से प्रबंधित मल्टी-फैक्टर फंड के लाभ
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संतुलित प्रदर्शन:
अलग-अलग फैक्टरों का संयोजन किसी एक के कमजोर पड़ने पर भी पोर्टफोलियो को स्थिर रखता है। -
लचीलापन:
एक्टिव फंड मैनेजर बाजार के संकेतों के आधार पर फैक्टर वेटेज (Weightage) बदल सकते हैं। -
डेटा और टेक्नोलॉजी आधारित चयन:
उन्नत एल्गोरिदम और क्वांट मॉडल्स की मदद से हर मार्केट साइकिल में सही स्टॉक्स का चयन किया जा सकता है। -
बेहतर जोखिम-समायोजित रिटर्न:
यह रणनीति अस्थिरता को कम करके दीर्घकालिक कंपाउंडिंग को मजबूत बनाती है।
🧭 निष्कर्ष: फैक्टरों की सिम्फनी से बनेगा मजबूत पोर्टफोलियो
जैसे एक ऑर्केस्ट्रा में हर वाद्ययंत्र मिलकर सुंदर संगीत रचता है, वैसे ही मल्टी-फैक्टर इन्वेस्टिंग अलग-अलग निवेश कारकों का संतुलित संगम है।
सक्रिय रूप से प्रबंधित मल्टी-फैक्टर फंड निवेशकों को बाजार की अस्थिरता से सुरक्षा देते हुए, दीर्घकालिक पूंजी वृद्धि (Long-Term Capital Appreciation) का अवसर प्रदान करते हैं।
“सिर्फ वही निवेशक डाइवर्सिफाई न करें जो हमेशा 100% सही होते हैं।”
— सर जॉन टेम्पलटन





