जब दूसरी तिमाही (Q2 FY26) की शेयरहोल्डिंग रिपोर्ट आई, तो एक दिलचस्प ट्रेंड सामने आया — कई बड़ी कंपनियों के प्रमोटर्स ने अपनी हिस्सेदारी घटाई है।
कहीं मामूली कटौती दिखी तो कहीं हिस्सेदारी में 25% तक की गिरावट दर्ज की गई। वजहें अलग-अलग हो सकती हैं — मुनाफा बुकिंग, नई रणनीतिक साझेदारी या पूंजी जुटाने की कवायद।
आइए जानते हैं कौन सी कंपनियां इस लिस्ट में शामिल हैं👇
⚙️ 1. CG Power and Industrial Solutions
- Q1 FY26: 58.05%
- Q2 FY26: 56.37%
📉 कमी: 1.68%
CG Power के प्रमोटर्स ने थोड़ी हिस्सेदारी घटाई है। यह संभवतः नए निवेशकों को लाने या कैपिटल रीबैलेंसिंग का हिस्सा हो सकता है।
🧪 2. Clean Science & Technology
- Q1 FY26: 74.96%
- Q2 FY26: 50.96%
📉 कमी: 24%
यह तिमाही की सबसे बड़ी गिरावटों में से एक है। लगभग 25% हिस्सेदारी कम होना दर्शाता है कि कंपनी में प्रमोटर्स की ओर से बड़ा सेकंडरी सेल या डायल्यूशन हुआ है।
🏠 3. Aptus Value Housing Finance
- Q1 FY26: 40.37%
- Q2 FY26: 23.87%
📉 कमी: 16.5%
यहां प्रमोटर्स ने बड़ी हिस्सेदारी बेची है। यह कदम संभवतः नए संस्थागत निवेशकों को मौका देने या रेगुलेटरी नियमों का पालन करने के लिए उठाया गया है।
🌾 4. AWL Agri Business
- Q1 FY26: 74.36%
- Q2 FY26: 63.94%
📉 कमी: 10.42%
Adani Wilmar के इस एग्री वर्टिकल में हिस्सेदारी घटाना इस बात का संकेत है कि कंपनी अपनी संरचना को फिर से व्यवस्थित कर रही है।
🏗️ 5. India Cements
- Q1 FY26: 81.49%
- Q2 FY26: 75.60%
📉 कमी: 5.89%
इंडिया सीमेंट्स के प्रमोटर्स ने अपनी हिस्सेदारी घटाई है ताकि कंपनी पर कर्ज बोझ घटाया जा सके और ग्रोथ को दोबारा पटरी पर लाया जा सके।
🧵 6. KPR Mill
- Q1 FY26: 67.52%
- Q2 FY26: 66.31%
📉 कमी: 1.21%
यह मामूली गिरावट है, जो प्रमोटर्स की सामान्य हिस्सेदारी रीबैलेंसिंग का हिस्सा लगती है।
💊 7. Blue Jet Healthcare
- Q1 FY26: 86.00%
- Q2 FY26: 79.81%
📉 कमी: 6.19%
IPO के बाद होने वाली सामान्य शेयर एडजस्टमेंट्स की वजह से प्रमोटर्स की हिस्सेदारी कम हुई है, जो SEBI के नियमों के अनुरूप है।
🧬 अन्य कंपनियां जिनमें हिस्सेदारी घटी:
- Cohance Lifesciences
- Authum Investment & Infrastructure
- Five Star Business Finance
- Alkem Laboratories
🔍 बाजार का संकेत:
Q2 FY26 प्रमोटर्स के लिए हिस्सेदारी में बदलाव का तिमाही साबित हुआ है।
कुछ कंपनियों में यह कदम रणनीतिक निवेशकों को लाने के लिए है, तो कुछ में मुनाफा बुकिंग या फंड जुटाने के लिए।
हालांकि, 20% से ज्यादा हिस्सेदारी में गिरावट को लेकर एक्सपर्ट्स का कहना है कि ऐसे बदलावों पर आने वाले क्वार्टर्स में नज़र रखना ज़रूरी होगा —
क्योंकि ये कंपनी के भीतर बड़ी स्ट्रैटेजिक री-स्ट्रक्चरिंग या प्रमोटर एग्ज़िट्स का संकेत हो सकते हैं।
📚 स्रोत: एक्सचेंज फाइलिंग्स, Moneycontrol, DRHP






