देखो कहानी स्टार्ट होती है उस बंदे से, जिसका नाम है पीयूष बंसल — वही, लेंसकार्ट वाला।
अब ये भाईसाहब किसी छोटे मोटे बिजनेस क्लास के बंदे नहीं हैं।
चार महीने पहले इनकी सूझबूझ ऐसी चली कि पूरे स्टार्टअप गलियारे में हलचल मच गई।
📈 कहानी कुछ यूं है —
पीयूष बंसल ने ₹200 करोड़ का लोन उठाया…
किसलिए? ताकि Lenskart में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा सके।
उस वक्त कंपनी की वैल्यूएशन थी $1 बिलियन।
अब आता है ट्विस्ट —
सिर्फ चार महीने बाद,
वही Lenskart की वैल्यूएशन पहुंच गई $8 बिलियन! 🤯
मतलब — 8X रिटर्न इन 4 मंथ्स!
धंधा चाहे मंदा हो… पर बंसल साहब हैं पूरी मौज में! 💸
👓 अब नंबरों पर एक नजर डालो:
Lenskart का मुनाफा (Profit):
- FY25: ₹297 करोड़ (लाभ में झूमा)
- FY24: ₹-10 करोड़ (हल्का घाटा)
- FY23: ₹-64 करोड़
- FY22: ₹-102 करोड़
- FY21: ₹-21 करोड़
मतलब भाई, चार साल घाटे में झूले और पांचवें साल बना डाला मुनाफे का चश्मा! 😎
📊 रेवेन्यू (कमाई):
- FY25: ₹6500 करोड़
- FY24: ₹5400 करोड़
- FY23: ₹3800 करोड़
- FY22: ₹1500 करोड़
- FY21: ₹900 करोड़
हर साल लाइन ऊपर ही जा रही है —
जैसे बंसल साहब की मुस्कान और इन्वेस्टर्स की उम्मीदें! 🚀
👁️🗨️ निचोड़ क्या है?
जहां बाकी स्टार्टअप्स घाटे में अपनी रील बना रहे हैं,
वहीं Lenskart ने ‘चश्मा बेचकर’ पूरा गेम पलट दिया।
अब इसको कहते हैं —
धंधा मंदा, पर बंदा मौज में! 💪





