दिल्ली में आज हो सकता है पहला क्लाउड सीडिंग ट्रायल, मौसम रहा तो बरस सकती है कृत्रिम बारिश

दिल्ली सरकार आज राजधानी में अपना पहला क्लाउड सीडिंग ट्रायल (Cloud Seeding Trial) करने की तैयारी में है। हालांकि यह प्रयोग मौसम की अनुकूलता पर निर्भर करेगा।

पर्यावरण मंत्री मंजींदर सिंह सिरसा ने जानकारी दी कि मंगलवार को (28 अक्टूबर) एक समीक्षा बैठक बुलाई गई है, जिसमें मौसम की स्थिति का आकलन कर ट्रायल की संभावना पर निर्णय लिया जाएगा।

“फ्लाइट मंगलवार को कानपुर से दिल्ली पहुंचेगी। अगर मौसम ने साथ दिया तो ट्रायल किया जाएगा। सब कुछ मौसम की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा,” सिरसा ने कहा।


☁️ क्या है क्लाउड सीडिंग?

क्लाउड सीडिंग एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है, जिसमें विमानों के ज़रिए बादलों में नमक या सिल्वर आयोडाइड जैसे रसायन छोड़े जाते हैं ताकि कृत्रिम रूप से बारिश कराई जा सके।

दिल्ली सरकार इस प्रयोग के ज़रिए वायु प्रदूषण कम करने का प्रयास कर रही है। सर्दियों के महीनों में वायु गुणवत्ता बिगड़ने पर नियंत्रण के लिए इसे एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।


💬 सीएम रेखा गुप्ता ने कहा — ‘यह दिल्ली के लिए ज़रूरी कदम’

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने पिछले सप्ताह कहा था कि दिल्ली में क्लाउड सीडिंग अब “ज़रूरत” बन चुकी है। उन्होंने इसे एक ऐतिहासिक और प्रयोगात्मक कदम बताया।

“दिल्ली में क्लाउड सीडिंग बेहद ज़रूरी है। यह अपने तरह का पहला प्रयोग है। हमें उम्मीद है कि यह सफल रहेगा और भविष्य में हम इससे प्रदूषण जैसी गंभीर समस्याओं पर काबू पा सकेंगे,” गुप्ता ने कहा।


🌧️ कब होगी कृत्रिम बारिश?

आईएमडी (भारत मौसम विभाग) के अनुसार, 28 से 30 अक्टूबर के बीच दिल्ली में बादल बनने की संभावना है।
गुप्ता ने एक्स (X) पर पोस्ट करते हुए कहा था, “अगर मौसम अनुकूल रहा, तो दिल्ली में 29 अक्टूबर को पहली कृत्रिम बारिश देखी जा सकती है।”

आज (28 अक्टूबर) सुबह दिल्ली में हल्की धुंध और बादल छाए रहने की संभावना जताई गई है। आईएमडी ने कहा है कि सुबह के समय हल्की बूंदाबांदी हो सकती है।


✈️ बुराड़ी में सफल ट्रायल ड्राई रन

दिल्ली सरकार ने पिछले सप्ताह बुराड़ी क्षेत्र में एक टेस्ट फ्लाइट कर क्लाउड सीडिंग उपकरणों की जांच की थी।
टेस्ट में सिल्वर आयोडाइड और सोडियम क्लोराइड के यौगिक छोड़े गए, लेकिन नमी 20% से कम होने के कारण बारिश नहीं हो सकी।

आईआईटी कानपुर की रिपोर्ट में बताया गया कि यह ट्रायल फ्लाइट मुख्यतः तकनीकी जांच के लिए थी — जिसमें विमान की क्षमता, क्लाउड सीडिंग फिटमेंट्स और विभिन्न एजेंसियों के समन्वय का परीक्षण किया गया।


📑 परियोजना के तहत 5 ट्रायल होंगे

डीजीसीए ने आईआईटी कानपुर को 1 अक्टूबर से 30 नवंबर के बीच ट्रायल करने की अनुमति दी है।
दिल्ली सरकार ने 25 सितंबर को आईआईटी कानपुर के साथ एमओयू (MoU) साइन किया था, जिसके तहत उत्तर-पश्चिम दिल्ली में 5 क्लाउड सीडिंग ट्रायल किए जाने हैं।

सरकारी अधिकारियों ने बताया कि दिल्ली के बहुप्रतीक्षित इस प्रयोग के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।


🌫️ उद्देश्य: प्रदूषण पर लगाम

क्लाउड सीडिंग प्रयोग का उद्देश्य दिल्ली की बिगड़ती वायु गुणवत्ता को सुधारना और शीतकालीन स्मॉग को नियंत्रित करना है।
अगर यह प्रयोग सफल रहा, तो यह भारत के पर्यावरण प्रबंधन के इतिहास में एक नई शुरुआत मानी जाएगी।


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