भारत में प्राइवेट इक्विटी निवेश तीन साल के उच्च स्तर पर, 26 अरब डॉलर का आंकड़ा पार – इक्विरस रिपोर्ट

मुंबई, 16 अक्टूबर 2025: भारत में प्राइवेट इक्विटी (PE) और वेंचर कैपिटल (VC) निवेश ने 2025 में जोरदार छलांग लगाई है। इक्विरस कैपिटल की रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी से सितंबर 2025 के बीच देश में कुल 26 अरब डॉलर के निवेश हुए हैं — यह पिछले तीन वर्षों का सबसे ऊंचा स्तर है।

मजबूत कृषि उत्पादन, सामान्य मानसून और त्योहारों के मौसम में उपभोक्ता मांग में सुधार ने निवेश माहौल को और बेहतर बनाया है। इससे भारत की आर्थिक वृद्धि पर वैश्विक निवेशकों का भरोसा और गहरा हुआ है।


2025 में निवेश ने 2023-24 का रिकॉर्ड तोड़ा

इक्विरस की रिपोर्ट बताती है कि कैलेंडर ईयर 2025 के पहले नौ महीनों में ही PE और VC निवेश का कुल मूल्य 2023 और 2024 के संयुक्त निवेश से अधिक हो गया है।
जनवरी से सितंबर 2025 के बीच 1,363 सौदे हुए, जबकि पूरे 2024 में 1,170 डील्स दर्ज की गई थीं। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि भारत की डील पाइपलाइन तेजी से मजबूत हो रही है और निवेशकों का उत्साह उच्च स्तर पर है।


बड़ी और रणनीतिक डील्स में बढ़ोतरी

इक्विरस कैपिटल के मैनेजिंग डायरेक्टर और इन्वेस्टमेंट बैंकिंग हेड भावेश शाह के अनुसार, “2025 में छोटे सौदों की हिस्सेदारी घटकर 40% रह गई है, जबकि मध्यम आकार की डील्स (10-25 मिलियन डॉलर) बढ़कर 31% पर पहुंच गई हैं।”

इस बदलाव की वजह से औसत डील वैल्यू 2024 के 34.4 मिलियन डॉलर से बढ़कर 2025 में 36.6 मिलियन डॉलर हो गई है। यानी निवेशक अब बड़े और रणनीतिक निवेशों को प्राथमिकता दे रहे हैं।


आईटी और कंज्यूमर सेक्टर बने निवेशकों के पसंदीदा

भारत के डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन ने आईटी और कंज्यूमर स्टेपल्स सेक्टर को निवेशकों के लिए सबसे आकर्षक बना दिया है।

  • आईटी सेक्टर की हिस्सेदारी PE/VC निवेश में 2024 के 23% से बढ़कर 2025 में 35% हो गई है।
    इसका श्रेय SaaS एक्सपोर्ट्स, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और एआई-आधारित सॉल्यूशंस की मांग को जाता है।
  • कंज्यूमर स्टेपल्स सेक्टर की हिस्सेदारी 2024 के 4% से बढ़कर 13% हो गई है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था और त्योहारों की मजबूत खपत को दर्शाती है।

वहीं, फाइनेंशियल और हेल्थकेयर सेक्टर में निवेश की हिस्सेदारी घटकर क्रमशः 11% और 7% रह गई है, जो 2024 में क्रमशः 18% और 19% थी।


एग्जिट गतिविधियों में गिरावट, पर बाजार मजबूत

हालांकि निवेश बढ़ा है, लेकिन निवेशकों की एग्जिट गतिविधियां (निकासी) धीमी रहीं।
2025 में एग्जिट वैल्यू घटकर 11 अरब डॉलर पर आ गई, जो पिछले चार वर्षों का सबसे निचला स्तर है।
2024 में यह आंकड़ा 20 अरब डॉलर था। इसके बावजूद, ब्लॉक डील्स और सेकेंडरी सेल्स बाजार में सक्रिय बनी रहीं, जिससे निवेश माहौल स्थिर बना हुआ है।


निष्कर्ष

इक्विरस की रिपोर्ट बताती है कि भारत अब वैश्विक निवेशकों के लिए एक स्थायी और भरोसेमंद मार्केट बन चुका है।
2025 में PE और VC निवेश में आई तेजी इस बात का संकेत है कि भारत आने वाले वर्षों में भी उच्च ग्रोथ, तकनीकी नवाचार और उपभोक्ता मांग के दम पर एशिया का सबसे बड़ा निवेश केंद्र बन सकता है।


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