Quote on RBI policy by सचिन सावरीकर मैनेजिंग पार्टनर Artha Bharat Investment Managers

RBI ने इस बार ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया, जिसे Artha Bharat Investment Managers के मैनेजिंग पार्टनर सचिन सावरीकर ने प्रैक्टिकल फैसला बताया है. उनका कहना है कि अब मौद्रिक नीति अपनी सीमाओं के करीब पहुंच चुकी है. सिस्टम में पहले ही करीब 125 बेसिस प्वाइंट की राहत दी जा चुकी है और लिक्विडिटी भी सपोर्टिव है, ऐसे में आगे रेट कट का असर सीमित ही रहेगा.वेस्ट एशिया में सीजफायर से कच्चे तेल और महंगाई पर दबाव कम हुआ है, जो शॉर्ट टर्म में राहत की खबर है. लेकिन अब असली चुनौती कैपिटल फ्लो की है. ग्लोबल अनिश्चितता और टाइट लिक्विडिटी के दौर में विदेशी निवेशक अब ज्यादा चुनिंदा हो गए हैं. भारत की मजबूत आर्थिक बुनियाद अब अकेले निवेश खींचने के लिए काफी नहीं है.

ऐसे में अब नीति का फोकस सिर्फ ब्याज दरों से आगे बढ़ना होगा. FPI निवेश बढ़ाने के लिए टैक्स क्लैरिटी, आसान नियम, बेहतर मार्केट एक्सेस और तेज फैसलों की जरूरत है. RBI अर्थव्यवस्था को स्थिर रख सकता है, लेकिन कैपिटल फ्लो बढ़ाने के लिए बाकी सुधार जरूरी होंगे.अगर कच्चा तेल कंट्रोल में रहता है तो RBI के पास विकल्प रहेंगे, लेकिन अगर ग्लोबल निवेशकों के लिए रास्ता आसान नहीं बनाया गया तो भारत अपनी ग्रोथ के हिसाब से निवेश नहीं जुटा पाएगा.

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